दो महीने की औपचारिक वार्ता के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अपने अंतिम चरण में है। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में स्थायी राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की जाएगी।
यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में यह समझौता एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
समझौते के अनुसार अमेरिका तत्काल प्रभाव से ईरान के तेल क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। इसके अलावा, यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौता हो जाता है, तो अमेरिका क्षेत्रीय देशों के सहयोग से प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस फंड में अमेरिका का प्रत्यक्ष वित्तीय योगदान अनिवार्य नहीं होगा।
परमाणु कार्यक्रम पर होगी निगरानी
समझौते के तहत ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को कम करेगा। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में पूरी की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से बनी वैश्विक चिंताओं को कम करने की दिशा में अहम साबित होगा। ईरान ने दोहराया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
ट्रंप की चेतावनी भी जारी
समझौते के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान समझौते का उल्लंघन करता है तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी व्यवस्था है, जिससे अगले दो महीनों में परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत और दीर्घकालिक वार्ताओं का रास्ता खुलेगा।
अमेरिका में भी उठे विरोध के स्वर
समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर बिल कैसिडी ने इसे “दशकों की सबसे बड़ी विदेश नीति की भूल” बताया।
उनका कहना है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर पर्याप्त रोक नहीं लगी है और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर अमेरिका ने गलत संदेश दिया है।
हिजबुल्लाह ने बताया ईरान की बड़ी जीत
लेबनान के शिया संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने इस समझौते को ईरान की “बड़ी जीत” करार दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने संघर्ष विराम के दायरे में लेबनान को भी शामिल करवाया, जो उसके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
होरमुज जलडमरूमध्य फिर खुलने की उम्मीद
समझौते के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना होगा। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि जलडमरूमध्य के खुलने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति सामान्य हो सकेगी और वैश्विक बाजारों को राहत मिलेगी।
लेबनान मोर्चे पर तनाव बरकरार
हालांकि समझौते के बाद हिंसा में कमी आई है, लेकिन लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में इजरायली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। इजरायल की सेना ने भी दावा किया है कि दक्षिणी लेबनान में ड्रोन हमले में उसके पांच सैनिक घायल हुए हैं। इसके अलावा कई रॉकेट हमलों को भी हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया।


