मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और पाला बदल सकते हैं।
सांसदों की बैठक में नहीं पहुंचे कथित बागी
स्थिति को देखते हुए शिवसेना (UBT) ने गुरुवार को अपने संसदीय बोर्ड की अहम बैठक बुलाई थी। पार्टी की ओर से सभी सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, जिन छेह सांसदों के बागी होने की चर्चा है, उनके बैठक में नहीं पहुंचने से अटकलों को और बल मिला है।
शिंदे गुट का दावा- ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल
शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विश्वास जाता है और शिवसेना में शामिल हो गए हैं।उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर हो चुका है। छह सांसदों ने आज एकनाथ शिंदे पर भरोसा जताया और शिवसेना का दामन थाम लिया है।”
हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संजय राउत का आरोप- सांसदों को खरीदने की कोशिश
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए 15 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है।
राउत ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अपना सपना मनी-मनी। महाराष्ट्र के सांसदों को पक्ष बदलने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल पार्टी को तत्काल कोई खतरा नहीं है और संगठन इस स्थिति से निपटने में सक्षम है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने किया राउट के आरोपों का समर्थन
शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संजय राउत के आरोपों का समर्थन करते हुए इसे “ऑपरेशन विश्वासघात” करार दिया।
उन्होंने कहा, “अगर संजय राउत ऐसा कह रहे हैं तो निश्चित रूप से उन्हें कुछ जानकारी मिली होगी। आज महाराष्ट्र का बच्चा-बच्चा जानता है कि ईमानदारी भी खरीदी और बेची जा सकती है।”
राजाभाऊ वाजे ने उद्धव ठाकरे के प्रति जताई निष्ठा
इस बीच शिवसेना (UBT) सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने बगावत की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह पूरी तरह उद्धव ठाकरे के साथ हैं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं बैठक में अपना रुख स्पष्ट कर चुका हूं। मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं और हमेशा रहूंगा।”
क्या कहते हैं आंकड़े?
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी अलग समूह को मान्यता पाने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। यानी कम से कम 6 सांसदों का एक साथ अलग होना जरूरी है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की है कि किसी भी कथित अलग गुट को जल्दबाजी में मान्यता न दी जाए।
बंगाल की घटना से बढ़ी चिंता
शिवसेना (UBT) की चिंता की एक बड़ी वजह हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक घटना भी है, जहां 14 जून को तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अपने विलय संबंधी पत्र सौंपा था। इसी तरह की स्थिति महाराष्ट्र में बनने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक भविष्य पर नजर
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सभी की नजर उद्धव ठाकरे गुट की अगली रणनीति और कथित बागी सांसदों के रुख पर टिकी हुई है। यदि छह सांसद वास्तव में शिंदे गुट के साथ जाते हैं तो यह 2022 में हुई बड़ी बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
रिपोर्ट – मानवी शर्मा


