लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश के 197 राजकीय, अनुदानित और पीपीपी मॉडल पर संचालित पॉलिटेक्निक संस्थानों में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कुल 58,776 सीटों पर दाखिले होंगे। इन संस्थानों में अलग-अलग डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश क्षमता तय कर दी गई है। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों की प्रवेश क्षमता को मंजूरी देने के साथ दाखिले को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। विभाग ने साफ किया है कि किसी भी संस्थान में तय सीटों से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान संस्थानों को मान्यता और सीटों से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश दिया जाना है, उन्हें संबंधित नियामक संस्था से सत्र 2026-27 के लिए मंजूरी मिली हुई है या नहीं। विभाग के निर्देश के मुताबिक, काउंसलिंग शुरू होने से पहले संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव स्तर से संबंधित पाठ्यक्रमों की मान्यता और प्रवेश क्षमता की जांच की जाएगी। इसके बाद ही उन पाठ्यक्रमों को काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि छात्र ऐसे पाठ्यक्रम में दाखिला न लें, जिसकी संबंधित सत्र के लिए मान्यता ही नहीं है। विभाग ने संस्थानों को भी प्रवेश के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
फार्मेसी से जुड़े डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के नियम लागू होंगे। इन पाठ्यक्रमों में तभी दाखिला दिया जाएगा, जब संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम को सत्र 2026-27 के लिए PCI की मंजूरी प्राप्त होगी। फार्मेसी के लिए स्वीकृत प्रवेश क्षमता में से 10 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए निर्धारित होंगी। संस्थानों को इन सीटों का आवंटन PCI के निर्धारित नियमों के अनुसार करना होगा।
फार्मेसी के अलावा अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए सीटें आरक्षित रहेंगी। इन पाठ्यक्रमों में AICTE के नियमों के तहत 10 प्रतिशत EWS सीटें रखी जाएंगी। इस तरह अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते समय अभ्यर्थियों को सीटों की संख्या के साथ-साथ अपनी श्रेणी से जुड़े आरक्षण नियमों का भी ध्यान रखना होगा।
आर्किटेक्चरल असिस्टेंटशिप और इंटीरियर डिजाइन एंड डेकोरेशन जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के दिशा-निर्देश लागू होंगे। यानी इन पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया और सीटों से जुड़े नियम संबंधित परिषद के मानकों के आधार पर तय होंगे। विभाग ने संस्थानों को निर्देश दिया है कि इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश देते समय निर्धारित मानकों और स्वीकृत सीट क्षमता का पूरी तरह पालन किया जाए।
प्रवेश क्षमता तय करने के साथ ही कुछ संस्थानों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को सत्र 2026-27 से बंद करने का भी फैसला किया गया है। मेरठ के देवनागरी पॉलीटेक्निक में पीजी डिप्लोमा इन वेब डिजाइनिंग और पीजी इन ब्यूटी एंड हेल्थ केयर पाठ्यक्रम में अब नए सत्र से प्रवेश नहीं होगा। इसी तरह बड़ौत के डीजे पॉलीटेक्निक में सिविल इंजीनियरिंग (एनवायरमेंटल एंड पॉल्यूशन कंट्रोल), कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम भी शैक्षिक सत्र 2026-27 से बंद किए जाएंगे।
पॉलिटेक्निक में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए इस बार सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे काउंसलिंग के दौरान संस्थान और पाठ्यक्रम की स्वीकृत सीटों और मान्यता की जानकारी जरूर जांच लें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश केवल निर्धारित क्षमता और संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी के आधार पर ही दिया जाएगा। प्रदेश के 197 पॉलिटेक्निक संस्थानों में कुल 58,776 सीटें उपलब्ध होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र तकनीकी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगे। अब प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ छात्रों की नजर काउंसलिंग कार्यक्रम और संस्थानवार सीटों की जानकारी पर रहेगी।

