यूपी में निकाय चुनाव की तैयारी तेज, EVM रखने के लिए जिलों में जमीन तलाश रहा प्रशासन - Nation27 >

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां अब धीरे-धीरे जमीन पर उतरने लगी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है। आयोग की ओर से प्रदेश के सभी 75 जिलों में ईवीएम रखने के लिए वेयरहाउस तैयार किए जाने की योजना है। इसके लिए जिलों से उपयुक्त जमीन का प्रस्ताव मांगा गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की इस कवायद से साफ है कि आगामी नगर निकाय चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं। इससे पहले वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव में नगर निगमों में ईवीएम और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों में मतपत्रों से मतदान कराया गया था।

ईवीएम को चुनाव के दौरान सुरक्षित रखना एक बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने सभी जिलाधिकारियों से वेयरहाउस के लिए जमीन का प्रस्ताव मांगा है। इसमें गोंडा समेत प्रदेश के सभी 75 जिले शामिल हैं। जिलों को अपने यहां नगर निकायों की संख्या और चुनाव में संभावित ईवीएम की जरूरत को देखते हुए जमीन का चयन करना होगा। आयोग चाहता है कि ईवीएम रखने के लिए ऐसी जगह चुनी जाए जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जा सकें और मशीनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डा. अखिलेश कुमार मिश्र की ओर से जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। जिलों से करीब एक महीने के भीतर जमीन से जुड़ा प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है।

अभी आयोग की कवायद का पहला चरण जमीन तलाशने का है। जिला प्रशासन की ओर से उपयुक्त जमीन का चयन किए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। चयनित जमीन के आधार पर वेयरहाउस के निर्माण की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट में वेयरहाउस की जरूरत, निर्माण से जुड़ी व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी प्रबंधों को शामिल किया जाएगा। यानी फिलहाल आयोग मशीनों को रखने की जगह तैयार करने की बुनियादी तैयारी में जुटा है।

ईवीएम को लेकर चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा हमेशा सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल रहती है। ऐसे में वेयरहाउस के लिए जमीन चुनते समय सिर्फ जगह की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयोग ने जिलों को ऐसी जगह तलाशने के संकेत दिए हैं जहां सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त हो। ईवीएम को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस तक पहुंच, परिसर की निगरानी और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजामों को भी ध्यान में रखा जाएगा। हाल ही में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान भी ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तर की जांच, रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग और अन्य प्रक्रियाओं में सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।

हर जिले में ईवीएम की जरूरत एक जैसी नहीं होगी। नगर निकायों की संख्या, संभावित मतदान केंद्रों और चुनावी व्यवस्था को देखते हुए अलग-अलग जिलों में मशीनों की संख्या अलग हो सकती है। इसी वजह से आयोग ने जिलों से जिलेवार अनुमानित ईवीएम संख्या के आधार पर जमीन का प्रस्ताव मांगा है। यानी जिस जिले में जितनी ज्यादा मशीनों की जरूरत होगी, वहां वेयरहाउस की क्षमता और जमीन की आवश्यकता भी उसी हिसाब से तय की जाएगी। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि चुनाव से पहले ईवीएम को इधर-उधर रखने की परेशानी न हो और जिले में ही उनके लिए सुरक्षित और व्यवस्थित भंडारण की सुविधा उपलब्ध रहे।

वेयरहाउस की तैयारी के साथ-साथ ईवीएम की खरीद को लेकर भी आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की जरूरत को देखते हुए ईवीएम की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित की जा चुकी है। ऐसे में जब नई मशीनें उपलब्ध होंगी तो उन्हें जिलों में सुरक्षित रखने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार रखना जरूरी होगा। इसी वजह से जमीन चयन की प्रक्रिया को चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023 में हुए नगर निकाय चुनाव में मतदान की व्यवस्था निकाय के प्रकार के आधार पर अलग थी। नगर निगमों के चुनाव ईवीएम से हुए थे, जबकि नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया था। अब राज्य निर्वाचन आयोग की मौजूदा तैयारियों में आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर व्यापक स्तर पर व्यवस्था तैयार की जा रही है। हालांकि चुनाव की अंतिम प्रक्रिया, कार्यक्रम और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े आधिकारिक निर्णय आयोग की ओर से जारी किए जाने होंगे।

नगर निकाय चुनाव में मतदान की तारीख आने में अभी समय है, लेकिन चुनाव कराने वाली मशीनरी ने अपनी तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं। ईवीएम की खरीद, उनके भंडारण के लिए जगह की तलाश और भविष्य में वेयरहाउस निर्माण की योजना इसी तैयारी का हिस्सा है। जिलाधिकारियों के सामने सबसे पहला काम उपयुक्त जमीन तलाशकर उसका प्रस्ताव भेजना है। जमीन का चयन होने के बाद डीपीआर और निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में जिलों में ईवीएम वेयरहाउस के लिए जमीनों का निरीक्षण और चयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

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