बुंदेलखंड के छोटे से गांव में जन्मे सुनील लोधी की जिंदगी किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है। जन्म से ही आंखों की रोशनी न होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आर्थिक तंगी के चलते वे कभी स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन उनके गले में छिपा सुर उन्हें एक दिन देश-दुनिया तक ले जाने वाला था। गांव-देहात और ट्रेनों में तंबूरा लेकर भजन गाकर वे अपना गुजारा करते थे, यह जाने बिना कि उनकी आवाज एक दिन करोड़ों दिलों तक पहुंचेगी।
पिछले महीने रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने सुनील की जिंदगी में नया मोड़ ला दिया। फिल्म में शामिल भजन “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई” सुनील की आवाज में रिकॉर्ड हुआ, और देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर छा गया। यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर इस भजन को करोड़ों बार देखा-सुना जा चुका है। लोग सुनील की भावुक और दमदार आवाज की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।
सुनील की आवाज तक पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है। शुरुआत में उनका एक अन्य हनुमान भजन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने कुछ स्थानीय गायकों का ध्यान खींचा। यह सिलसिला आगे बढ़ते हुए फिल्म निर्माता और संगीत निर्देशक तक जा पहुंचा, जो सुनील की आवाज सुनकर इतने प्रभावित हुए कि उन्हें ढूंढते हुए मुंबई ले आए। यहीं से सुनील का सफर एक साधारण लोकगायक से राष्ट्रीय पहचान की ओर मुड़ गया।
आज सुनील लोधी की कहानी हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। सम्मान और बड़े संगीत प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव अब उनके पास आने लगे हैं, और जो शख्स कभी ट्रेनों में भजन गाकर जीविका चलाता था, वह आज देश के सबसे चर्चित गायकों में शुमार हो चुका है।
रिपोर्ट- सोनू सिंह
