Sajjan Kumar: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी एक ऐसी कहानी है, जो एक साधारण चाय-डेयरी की दुकान से शुरू होकर संसद के गलियारों तक पहुंची और अंततः तिहाड़ जेल की चारदीवारी में खत्म हुई। गुरुवार को तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार का निधन हो गया, लेकिन उनसे पहले का उनका राजनीतिक सफर दिल्ली की राजनीति के सबसे नाटकीय अध्यायों में गिना जाता रहा है।

चाय की दुकान

अपने शुरुआती दिनों में सज्जन कुमार एक साधारण चाय बेचने का छोटा-मोटा कारोबार चलाया करते थे। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि यह साधारण दुकानदार आगे चलकर दिल्ली की राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार होगा। उनकी किस्मत तब बदली जब उनकी मुलाकात कांग्रेस के दिग्गज नेता एच.के.एल. भगत से हुई, जिन्हें उस दौर में दिल्ली का “बेताज बादशाह” कहा जाता था। भगत के भरोसे और समर्थन से सज्जन कुमार को नगर पार्षद का चुनाव लड़ने का मौका मिला, और उन्होंने यह चुनाव जीत भी लिया। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की असली शुरुआत हुई। Sajjan Kumar

संजय गांधी के करीबी

पार्षद बनने के बाद सज्जन कुमार का प्रभावशाली और दबंग व्यक्तित्व जल्द ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की नजरों में आ गया। उनकी करीबी संजय गांधी से बढ़ने लगी, और वे धीरे-धीरे कांग्रेस के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाने लगे। यह करीबी उनके राजनीतिक कद को लगातार ऊंचाई देती गई। सज्जन कुमार का कद बढ़ने लगा। उनके करीबी लोगों का कहना है कि उस दौर में उनकी उपस्थिति कांग्रेस मंच के लिए आवश्यक हो गई थी। Sajjan Kumar

CM को हराने वाले सज्जन कुमार

सज्जन कुमार के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 1977 में आया। उस समय कांग्रेस पार्टी देशभर में मुश्किल दौर से गुजर रही थी, बावजूद इसके पार्टी ने सज्जन कुमार को बाहरी दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार बनाने का साहसिक फैसला लिया। इस चुनाव में उनका मुकाबला चौधरी ब्रह्म प्रकाश से था, जो इससे पहले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रह चुके थे। सबको चौंकाते हुए सज्जन कुमार ने यह चुनाव जीत लिया और एक बड़े राजनीतिक दिग्गज को हराकर “जायंट किलर” के रूप में अपनी पहचान बनाई। इस जीत ने उन्हें दिल्ली कांग्रेस में एक मजबूत और स्थायी स्थान दिला दिया। Sajjan Kumar

तीन बार सांसद रहे

अपने पूरे राजनीतिक करियर में सज्जन कुमार तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए — 1980, 1991 और 2004 में। वे बाहरी दिल्ली क्षेत्र में कांग्रेस के सबसे मजबूत चेहरों में से एक बन गए थे। हालांकि 1984 के सिख विरोधी दंगों में उनका नाम आने के बाद उनकी राजनीतिक साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।

नतीजतन 1989 के चुनावों में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, और वह सीट कांग्रेस हार भी गई। 2009 में भी उनकी उम्मीदवारी तब वापस ले ली गई, जब एक सिख पत्रकार ने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर जूता फेंकने की घटना को अंजाम दिया। हालांकि इसके बावजूद सज्जन कुमार अपने भाई रमेश कुमार को टिकट दिलवाने और उनकी जीत सुनिश्चित कराने में कामयाब रहे। Sajjan Kumar

1984 दंगे

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के अगले ही दिन दिल्ली में सिख समुदाय को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अकेले दिल्ली में ही सिख समुदाय के हजारों लोगों की जान गई थी। सज्जन कुमार इन दंगों से जुड़े सबसे विवादित नामों में शामिल हो गए, और उन पर दिल्ली कैंट क्षेत्र में सिखों की हत्या में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे। Sajjan Kumar

तिहाड़ जेल

2018 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सज्जन कुमार का राजनीतिक करियर पूरी तरह समाप्त हो गया। उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद फरवरी 2025 में एक और मामले में भी उन्हें दोषी करार दिया गया। जो व्यक्ति कभी चाय बेचकर अपनी जिंदगी शुरू करता था और आगे चलकर संसद तक पहुंचा, उसका आखिरी सफर तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बीता, जहां गुरुवार को उसका निधन हो गया। Sajjan Kumar

सोनू सिंह @Nation27

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