NDA संसद का मानसून सत्र हंगामे और गतिरोध के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। पिछले एक सप्ताह से NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के मुद्दों को लेकर विपक्ष के जोरदार प्रदर्शन के चलते संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी। हालांकि, अब सूत्रों का दावा है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है और लोकसभा में आज ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा शुरू हो सकती है। NDA
संसद में गतिरोध और सुलह की कोशिशें
सोमवार को सदन में बिल पेश किए जाने के बाद भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के फ्लोर लीडर्स के साथ कई दौर की वार्ता की। अध्यक्ष ने सदन में स्पष्ट कहा, “लोकसभा नारे लगाने के लिए नहीं, बल्कि विधेयकों पर चर्चा के लिए चुनी गई है।” माना जा रहा है कि उनके प्रयासों के बाद विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हुआ है। NDA
क्या है नया संशोधन विधेयक?
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को यह संशोधन विधेयक पेश किया। यह विधेयक 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए लाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य संगठित तरीके से की जाने वाली परीक्षा धांधली और पेपर लीक पर लगाम लगाना है। संगठित पेपर लीक में शामिल लोगों को 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान। NDA
भारी जुर्माना
धांधली करने वाले गिरोहों या व्यक्तियों पर 10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना। विश्वसनीयता: परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए जांच और दंड संबंधी नियमों को और अधिक कड़ा करना। सरकार का मानना है कि यह कानून युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली में खोया हुआ भरोसा बहाल करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा। NDA
युवा सांसदों पर NDA का दांव
इस महत्वपूर्ण बहस के लिए सरकार ने विशेष रणनीति अपनाई है। उम्मीद है कि इस बिल पर लगभग 8 से 10 घंटे लंबी चर्चा होगी, जिसमें भाजपा और एनडीए के युवा सांसदों को प्रमुखता दी जाएगी। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या जैसे चेहरे चर्चा में हिस्सा लेंगे। वहीं सहयोगी दलों की ओर से सायोनी घोष, मिताली बाग, लावु श्री कृष्ण देवरायलु, लल्लन सिंह, डॉ. श्रीकांत शिंदे, सुनील तटकरे, अनुप्रिया पटेल और अरुण भारती जैसे सांसद अपने विचार रखेंगे। नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पहली बार सदन में शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब देते नजर आएंगे। NDA
विपक्ष की मांग और रुख
विपक्ष ने सैद्धांतिक रूप से पेपर लीक रोकने वाले कानूनों का समर्थन किया है, लेकिन उनकी मुख्य चिंता प्रशासनिक जवाबदेही है। विपक्ष का तर्क है कि कानून से ज्यादा जरूरी है उन घटनाओं की जिम्मेदारी तय करना जो छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि विपक्ष चर्चा से नहीं भाग रहा, लेकिन सरकार को पहले पुलिस कार्रवाई और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में बयान देना चाहिए। NDA
राजनीतिक महत्व
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से हटने के बाद यह पहली बड़ी विधायी बहस है। यह चर्चा न केवल परीक्षा सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी सरकार और विपक्ष के बीच ‘शक्ति परीक्षण’ जैसा है। जहां सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करेगी, वहीं विपक्ष NEET विवाद की निष्पक्ष जांच और छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा। NDA
संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले, यह देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के हित में है। अब नजरें दोपहर 12 बजे शुरू होने वाली चर्चा पर टिकी हैं कि क्या संसद वाकई हंगामे से हटकर सार्थक बहस की ओर बढ़ पाएगी। NDA
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