UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर सीटों के बंटवारे पर भाजपा इसी महीने से मंथन शुरू करने जा रही है। इसी कड़ी में निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा नेतृत्व से मुलाकात कर रणनीति पर चर्चा की। वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने संगठन की नई टीम के गठन को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के साथ अंतिम दौर की बैठक की है।
उत्तर प्रदेश में समय से पहले चुनाव होने की संभावनाओं के बीच भाजपा जल्द ही अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत शुरू कर सकती है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन की नई केंद्रीय टीम के गठन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद चुनावी रणनीति और गठबंधन के समीकरणों पर मंथन तेज होगा।
उत्तर प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने की अटकलों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी जल्द ही अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू कर सकती है। भाजपा नेतृत्व फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और संगठन की नई केंद्रीय टीम के गठन का इंतजार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद पार्टी गठबंधन सहयोगियों के साथ चुनावी रणनीति, सीटों के तालमेल और अन्य अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेगी। भाजपा का लक्ष्य सहयोगी दलों के साथ समय रहते सहमति बनाकर आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना है।
गौरतलब है कि इसी क्रम में भाजपा के सहयोगी दलों सुभासपा और निषाद पार्टी के प्रमुखों ने गुरुवार को भाजपा नेतृत्व से मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई और सहयोगी दलों ने सीट बंटवारे को लेकर जल्द मंथन शुरू करने का आग्रह किया।
सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, जो मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे, उन्होंने भाजपा मुख्यालय में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की। बैठक के दौरान आगामी चुनावी रणनीति, गठबंधन की स्थिति और सीटों के तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
इसके बाद सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री सुनील बंसल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस दौरान भाजपा नेतृत्व से सीट बंटवारे को लेकर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने की मांग की। साथ ही आगामी चुनावों को देखते हुए गठबंधन की रणनीति और समन्वय पर भी चर्चा की गई।
भाजपा नेतृत्व ने दोनों सहयोगी दलों के नेताओं को आश्वस्त किया है कि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत इसी महीने के अंत तक शुरू कर दी जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा भी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को जल्द गति देना चाहती है।
इसी क्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन पर अंतिम मुहर लग चुकी है। गौरतलब है कि पंकज चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने नई टीम के गठन को लेकर पार्टी अध्यक्ष और संगठन महासचिव के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। माना जा रहा है कि चौधरी इस सप्ताह अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, गोरखपुर और वाराणसी क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर कुछ मतभेद थे, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है। नई टीम में सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को स्थान मिलने की संभावना है। साथ ही विभिन्न मोर्चों में नए चेहरों को मौका दिया जाएगा और कार्यकारिणी में भी करीब 50 प्रतिशत नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर प्रचार अभियान और चुनावी रणनीति का साझा रोडमैप तैयार करने में जुटी है। पार्टी नेतृत्व जुलाई तक सीट बंटवारे के साथ-साथ चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप देने की योजना बना रहा है।
फिलहाल भाजपा 5 जून से 21 जून तक सेवा पखवाड़ा अभियान चला रही है। इसके अलावा इसी महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन की नई केंद्रीय टीम के गठन की प्रक्रिया भी पूरी होनी है। ऐसे में पार्टी अगले महीने इन सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे सकती है।
विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी द्वारा प्रदेश कार्यकारिणी को भंग किए जाने को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी चुनावों में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की व्यापक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
2024 के लोकसभा चुनावों के बाद एनडीए का हिस्सा बनने के पश्चात पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए केवल राजनीतिक विरासत पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत संगठन और व्यापक जनाधार भी जरूरी है।
इसी सोच के तहत संगठन की समीक्षा के बाद उसमें व्यापक बदलाव का निर्णय लिया गया है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित पहचान से बाहर निकलकर पूरे प्रदेश में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।
जाट राजनीति और किसान आंदोलनों की पारंपरिक छवि से आगे बढ़ते हुए रालोद अब अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए ऐसे नेताओं को आगे लाने की तैयारी है, जो नए क्षेत्रों में संगठन का विस्तार करने की क्षमता रखते हों।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कई जिलों में संगठनात्मक गतिविधियां अपेक्षित स्तर पर नहीं थीं। सदस्यता अभियान की प्रगति को लेकर भी नेतृत्व संतुष्ट नहीं था। कई कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित रहे, जबकि संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की जरूरत महसूस की गई। इसी वजह से विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला लिया गया है।


