बारिश का मौसम अपने साथ राहत तो लाता है, लेकिन यह अपने पीछे बीमारियों का एक बड़ा सिलसिला भी छोड़ जाता है। इन दिनों Pink Eye कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), जिसे आम भाषा में ‘Pink Eye’ या ‘आंख आना’ कहा जाता है, तेजी से फैल रहा है। खास तौर पर बंद जगहों जैसे कि ऑफिस, स्कूल और सार्वजनिक परिवहन में यह संक्रमण जंगल की आग की तरह फैल रहा है। यदि आप इस बीमारी से बचना चाहते है को इसके कारण और बचाव के बारे में जानकारी होना जरुरी है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
घर और ऑफिस में एक ही वस्तुएं जैसे बेड, पिलो, टावल, पानी की बोतल और टेबल जैसी साझा चीजों का इस्तेमाल करते हैं। यदि कोई एक व्यक्ति इस संक्रमण की चपेट में है, तो उसके द्वारा छुई गई सतहों के माध्यम से यह वायरस या बैक्टीरिया दूसरे सहकर्मियों तक आसानी से पहुंच जाते हैं। एक ही हवा में लंबे समय तक रहने और साझा वस्तुओं को छूने से संक्रमण की चेन बन जाती है, जिससे पूरा वातावरण इसकी चपेट में आ सकता है।
क्या है ‘पिंक आई’ और इसके पीछे के कारण?
Conjunctivitis हमारी आंखों के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी हिस्से को ढकने वाली एक पतली झिल्ली (कंजंक्टिवा) में होने वाली सूजन या संक्रमण है। जब इस झिल्ली में इंफेक्शन होता है, तो आंखें लाल या गुलाबी दिखाई देने लगती हैं। बैक्टीरियल और वायरल ये दोनों प्रकार बेहद संक्रामक होते हैं। धूल, मिट्टी या प्रदूषण से होने वाली एलर्जी के कारण भी आंखें लाल हो सकती हैं, लेकिन यह एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती।
कैसे फैलता है यह संक्रमण?
पिंक आई मुख्य रूप से संपर्क से फैलती है। घर या ऑफिस में इसके फैलने के प्रमुख माध्यम हैं। घर में बेड, पिलो, टावल और ऑफिस में कीबोर्ड, माउस, फोन, या स्टेशनरी का साझा इस्तेमाल इसके फेलने के कारण हो सकते हैं। एक ही तौलिये का प्रयोग, चश्मा शेयर करना या दूसरे का आई-मेकअप इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। संक्रमित आंख को छूने के बाद बिना हाथ धोए किसी वस्तु को छूने से भी तुरंत फैलता है। Pink Eye
पहचानें ‘पिंक आई’ के लक्षण
यदि आपको अपनी आंखों में नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो इसे हल्के में न लें। इसकी पहचान के आसानी से की जा सकती है। जैसे आंखों का असामान्य रूप से लाल या गुलाबी दिखना। आंखों से लगातार पानी आना या जलन होना। आंखों में खुजली और ‘कुछ चुभने’ जैसा अहसास। पलकों में सूजन आना। आंखों से चिपचिपा डिस्चार्ज निकलना, जिसके कारण सुबह उठने पर पलकें आपस में चिपकी हुई महसूस होती हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखते हैं, तो स्वयं इलाज (Self-medication) करने के बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें। Pink Eye
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बचाव के लिए क्या करें?
सावधानी ही इस संक्रमण का सबसे बड़ा इलाज है। खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का पालन करें। हाथों की स्वच्छता बहुत जरुरी है। अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं। यदि पानी उपलब्ध न हो, तो अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग करें। आंखों को न छुएं: दिनभर अपने हाथों को आंखों के आसपास ले जाने से बचें। चीजें शेयर न करें: अपने आई-ड्रॉप्स, चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस, तौलिया या रुमाल किसी के साथ साझा न करें। साझा सतहों को सैनिटाइज करें: अपने डेस्क, कीबोर्ड और माउस को समय-समय पर डिसइंफेक्टेंट वाइप्स से साफ करते रहें। Pink Eye

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संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें
यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण हुआ है, तो उनसे उचित दूरी बनाए रखें और उनके द्वारा छुई गई चीजों को सीधे छूने से बचें। लेंस का उपयोग बंद करें: यदि आपको संक्रमण के लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत कॉन्टैक्ट लेंस पहनना बंद कर दें और चश्मे का प्रयोग करें। मानसून के दौरान स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी सी सतर्कता हमें बड़ी परेशानियों से बचा सकती है। ऑफिस में काम करते समय स्वच्छता के नियमों का पालन न केवल आपकी अपनी आंखों की सुरक्षा करेगा, बल्कि आपके सहकर्मियों को भी इस कष्टदायक संक्रमण से बचाएगा। स्वस्थ रहें और सुरक्षित रहें! Pink Eye
Disclaimer: लेख में दी गई सलाह और सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं। इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी सवाल या समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
सोनू सिंह @Nation27

