मेरठ: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परतापुर क्षेत्र के गंगोल रोड स्थित सहकारी डेरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्राचार्या वंदना सिंह को कथित तौर पर 1.35 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि उन्होंने एक बिल पास कराने के एवज में शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप लगाया और निर्धारित रकम लेते समय प्राचार्या को पकड़ लिया।

बिल पास कराने के नाम पर मांगी गई रिश्वत

जानकारी के मुताबिक, संस्थान से जुड़े एक बिल को पास कराने के लिए शिकायतकर्ता से कथित तौर पर रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने मामले की जानकारी एंटी करप्शन टीम को दी। शिकायत की जांच के बाद टीम ने आरोपों की पुष्टि के लिए जाल बिछाने की तैयारी शुरू की। इसके बाद टीम ने शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ भेजा। जैसे ही कथित तौर पर 1.35 लाख रुपये की रिश्वत ली गई, एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर दी। टीम ने प्राचार्या वंदना सिंह को हिरासत में ले लिया।

ट्रैप लगाकर की गई कार्रवाई

बताया जा रहा है कि कार्रवाई के लिए एंटी करप्शन विभाग की एक बड़ी टीम मौके पर पहुंची थी। करीब एक दर्जन से अधिक अधिकारी और कर्मचारी इस कार्रवाई में शामिल रहे। पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि आरोपी को इसकी भनक न लग सके। प्राचार्या के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर जैसे ही संस्थान में पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच पूरे मामले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कार्रवाई के बाद टीम ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की।

16 जुलाई को ही संभाला था प्राचार्या का चार्ज

इस मामले में एक और बात चर्चा में है कि वंदना सिंह ने 16 जुलाई को ही संस्थान की प्राचार्या का पदभार संभाला था। पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद रिश्वत के आरोप में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से विभाग में सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी। एंटी करप्शन टीम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर भी मामले को लेकर हलचल बढ़ गई है।

अधिकारियों में भी मचा हड़कंप

मेरठ में एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर सरकारी संस्थानों में रिश्वतखोरी की शिकायतों को लेकर विभाग लगातार सख्ती की बात करता रहा है। ऐसे में एक वरिष्ठ पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

एंटी करप्शन टीम पूरे मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। रिश्वत की रकम, शिकायत और ट्रैप कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है। मामले में आगे जांच के बाद ही यह साफ होगा कि कथित रिश्वतखोरी के पीछे पूरा घटनाक्रम क्या था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

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