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ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में नया मोड़ आया है। पाकिस्तान के माध्यम से चल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी के बजाय अब कतर की टीम सीधे तेहरान पहुंच गई है, जिससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने कतर को बातचीत में शामिल करके नया दांव खेला है, जो यह संकेत देता है कि पाकिस्तान पर अब उस भरोसा नहीं रहा।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम पर चल रही बातचीत में अब एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आ गया है। पहले तक पाकिस्तान और उसके आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को इस बैकचैनल डिप्लोमेसी का मुख्य चेहरा माना जा रहा था, लेकिन कतर की एंट्री ने पूरी तस्वीर बदल दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कतर की नेगोशिएशन टीम शुक्रवार को सीधे तेहरान पहुंची और अमेरिका के साथ मिलकर ईरान से बातचीत कर रही है। इसका मकसद युद्ध को खत्म करना और बाकी लंबित मुद्दों पर अंतिम समझौता करना बताया जा रहा है।

यानी, जिस बातचीत में पाकिस्तान खुद को अहम खिलाड़ी मान रहा था, वहां अब ट्रंप प्रशासन ने कतर को भी शामिल कर नया चैनल खोला है। अभी तक पाकिस्तान कोई ठोस डील नहीं करा पाया है, जिससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका खाड़ी के अन्य देशों की मदद लेने में भी सक्षम है।

वॉर वार्ता में कूटनीतिक ट्विस्ट: आसिम मुनीर की भूमिका पर उठे सवाल 

दिलचस्प बात यह है कि आसिम मुनीर खुद भी तेहरान पहुंचे हैं, लेकिन उसी समय कतर की टीम का सीधे पहुंचना यह संकेत देता है कि अमेरिका अब केवल पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहता। पहले तक पाकिस्तान को बातचीत का प्रमुख मध्यस्थ माना जा रहा था, लेकिन कतर की सीधी एंट्री से यह संदेश गया है कि ट्रंप ने एक बैकअप चैनल भी तैयार कर लिया है। यानी अगर पाकिस्तान के जरिए डील में कोई प्रगति नहीं होती, तो अमेरिका अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी कतर को सीधे शामिल कर सकता है।

कतर की एंट्री क्यों अहम?

कतर पहले भी गाजा युद्ध, अफगानिस्तान और कई पश्चिम एशियाई संकटों में बैकचैनल मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है। कतर अमेरिका का प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (Major Non-NATO Ally) है और यहां स्थित अल उदैद एयर बेस मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा केंद्र है। हालांकि इस युद्ध के दौरान ईरान ने कतर पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए थे, जिससे उसकी LNG आपूर्ति को भारी नुकसान हुआ। इसके बावजूद, कतर अब फिर से वार्ता की मेज पर लौट आया है।

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