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भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था. इसका जन्म कटाक्ष करने वाले ऑनलाइन प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था.

दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, “समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.”

जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है. उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं.” लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया. 

कुछ ही घंटों में अभिजीत को 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिल गए और इंटरनेट पर शुरू हुआ एक मज़ाक धीरे-धीरे सार्वजनिक असंतोष, हास्य और राजनीतिक हताशा को अभिव्यक्त करने वाले एक अनौपचारिक संगठन में बदल गया. अभिजीत इस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी को लेकर कहा, ”कॉकरोच युवाओं की उस असहमति के भाव को व्यक्त करती है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी कहा था. भारत जैसे लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं था, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षक माना जाता है. उन्होंने आलोचना करने के कारण युवाओं को अपमानित किया.”

इंस्टाग्राम पर दुनिया की ‘सबसे बड़ी पार्टी’ में बीजेपी की रैंकिंग में गिरावट

सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तेजी से लोकप्रिय हो गई है और इसके फॉलोअर्स लाखों से बढ़कर लगभग दो करोड़ तक पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स सत्ताधारी बीजेपी से भी ज्यादा हो गए हैं।

यह पार्टी अब सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। आम लोग भी सोशल मीडिया पर इसकी बात कर रहे हैं।

ब्रिटिश मीडिया संस्थान द गार्डियन ने 21 मई को इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई युवा इसे अपने गुस्से और निराशा को व्यक्त करने का एक नया तरीका मान रहे हैं। साथ ही, इसे एक व्यंग्यात्मक और पैरोडी राजनीतिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

लोगों का समर्थन क्यों?

क़तर के मीडिया संस्थान अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभियान से कई प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियां भी जुड़ रही हैं। इनमें पश्चिम बंगाल से टीएमसी सांसद Mahua Moitra और Kirti Azad शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल केंद्र सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी भी शुरुआती लोगों में थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में जानने के बाद इस पार्टी से जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन किया।

अल जज़ीरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के समय में दक्षिण एशिया जेन-ज़ी (युवा) आंदोलनों का बड़ा केंद्र बन गया है। श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में युवाओं के आंदोलनों ने कई बार सरकारों को प्रभावित किया है या बदल दिया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ-साथ असमानता, बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इसके अनुसार भारत हर साल 80 लाख से ज्यादा ग्रेजुएट तैयार करता है, लेकिन उनमें बेरोजगारी दर लगभग 29.1 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।  रॉयटर्स ने लिखा है, ”सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ग्राफिक्स और वीडियो पोस्ट किए जाते हैं, जिनमें मीडिया की स्वतंत्रता से लेकर संसद और मंत्रिमंडल की आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने जैसे मुद्दों तक पर चर्चा होती है. इसने हाल ही में नीट प्रवेश परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे को भी उठाया, जिसका प्रश्न नपत्र लीक हो गया था और इससे लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए.”

युवाओं में बढ़ती बेचैनी और असंतोष

रॉयटर्स ने लिखा है, ”भारत के युवाओं के भीतर बेचैनी इस सप्ताह प्रकाशित डीलॉइट ग्लोबल सर्वे में भी दिखाई दी.सर्वे में कहा गया कि भारत की जेन-ज़ी आबादी यानी 1995 से 2007 के बीच जन्मे युवा रोज़गार की कमी और बढ़ती महंगाई से बुरी तरह प्रभावित हुई है. सर्वे के अनुसार, “जेन-ज़ी में वित्तीय तनाव ज़्यादा है. बड़ी संख्या में युवा घर ख़रीदने की मुश्किलों और आर्थिक असुरक्षा की बात कर रहे हैं.”

भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां युवाओं की संख्या भी सबसे ज्यादा है। कुल 1.42 अरब आबादी में करीब 65% लोग 35 साल से कम उम्र के हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 15 साल और उससे ऊपर उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर 3.1% रही। लेकिन 15 से 29 साल के युवाओं में यह दर काफी ज्यादा यानी 9.9% दर्ज की गई। इसमें शहरी इलाकों में बेरोजगारी 13.6% और ग्रामीण क्षेत्रों में 8.3% रही।

यूएई की मीडिया वेबसाइट खलीज टाइम्स ने भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस आंदोलन का नाम एक राजनीतिक पार्टी जैसा है, लेकिन फिलहाल इसके चुनाव लड़ने के कोई संकेत नहीं हैं।

रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या भारत भी कभी नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में जा सकता है। हालांकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ किया है कि इसका जवाब ‘नहीं’ है।

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