चीनी मांझा: त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में पतंगों की रौनक लौट आती है। छतों पर बच्चों से लेकर बड़े तक पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। लेकिन इस उत्साह के बीच एक ऐसा खतरा भी मंडरा रहा है, जो हर साल कई लोगों और हजारों पक्षियों की जान ले लेता है। यह खतरा है चीनी मांझा, जिसे कई जगहों पर “किलर मांझा” भी कहा जाता है।
धागे जैसा दिखने वाला यह मांझा बेहद खतरनाक होता है। इसकी धार इतनी तेज होती है कि यह पल भर में किसी की गर्दन, हाथ या चेहरे को गंभीर रूप से घायल कर सकता है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में इसके इस्तेमाल, बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद यह चोरी-छिपे बाजारों में बिकता रहता है और हर साल कई हादसों की वजह बनता है।
सामान्य सूती धागे से अलग चीनी मांझा नायलॉन या सिंथेटिक फाइबर से बनाया जाता है। इसे और ज्यादा मजबूत तथा धारदार बनाने के लिए इस पर कांच का बारीक पाउडर और कई बार धातु के कण भी चढ़ाए जाते हैं। इसकी मजबूती के कारण यह आसानी से टूटता नहीं है और बिजली के तारों, पेड़ों तथा सड़कों पर लंबे समय तक फंसा रहता है।
यही वजह है कि यह केवल पतंगबाजी तक सीमित खतरा नहीं रहता, बल्कि राहगीरों, बाइक सवारों और पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित होता है।
चीनी मांझे से सबसे अधिक खतरा दोपहिया वाहन चालकों को होता है। सड़क पर तेज रफ्तार में चलते समय अगर मांझा अचानक गर्दन या चेहरे से टकरा जाए तो गंभीर चोट लग सकती है। कई मामलों में लोगों की जान तक चली गई है।
इसके अलावा कबूतर, चील, तोता, कौआ और अन्य पक्षी उड़ते समय इस मांझे में फंस जाते हैं। उनके पंख कट जाते हैं और वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई पक्षी इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठन हर साल त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में घायल पक्षियों का रेस्क्यू करते हैं।
चीनी मांझा बिजली के तारों पर फंसने से शॉर्ट सर्किट और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं भी पैदा करता है। कई बार ट्रांसफॉर्मर तक खराब हो जाते हैं। चूंकि यह प्लास्टिक आधारित होता है, इसलिए लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है।
देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी मांझे की बिक्री, खरीद, भंडारण और इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इनमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और कई अन्य राज्य शामिल हैं। त्योहारों के दौरान प्रशासन लगातार बाजारों में छापेमारी कर अवैध रूप से बिक रहे चीनी मांझे को जब्त करता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और विभिन्न राज्य सरकारों के निर्देशों के अनुसार प्लास्टिक या नायलॉन से बने तथा धातु या कांच की परत वाले मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कई राज्यों में दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागे या पर्यावरण के अनुकूल मांझे का ही इस्तेमाल करना चाहिए। खुले मैदान या सुरक्षित स्थान पर पतंग उड़ाएं और सड़क, बिजली की लाइन या भीड़भाड़ वाले इलाकों के पास पतंगबाजी से बचें। अगर कहीं चीनी मांझा दिखाई दे तो उसे स्वयं हटाने की बजाय प्रशासन या संबंधित विभाग को सूचना दें।
पतंग उड़ाना हमारी संस्कृति और त्योहारों का अहम हिस्सा है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। चीनी मांझे का इस्तेमाल न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह इंसानों, पक्षियों और पर्यावरण तीनों के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में सुरक्षित और जिम्मेदार पतंगबाजी ही त्योहार की असली खुशी है, ताकि आसमान रंगों से भरा रहे, लेकिन किसी की जिंदगी खतरे में न पड़े।

