नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर काॅकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके दौरान भड़की हिंसा की जांच अब डिजिटल एंगल तक पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि शुरुआती साइबर और फोरेंसिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि सोशल मीडिया के जरिए माहौल को भड़काने की कोशिश की गई थी। इसी सिलसिले में पुलिस ने Meta, Google और X (पूर्व में ट्विटर) से कई संदिग्ध अकाउंट्स की IP एड्रेस और अन्य तकनीकी जानकारी मांगी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे पोस्ट, वीडियो और रील्स वायरल किए गए, जिनका मकसद लोगों को उकसाना और भीड़ को भड़काना हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पोस्ट्स के पीछे कौन लोग थे और क्या इन्हें किसी संगठित नेटवर्क के जरिए फैलाया गया था।
20 से 23 जुलाई के बीच सबसे ज्यादा एक्टिव रहे संदिग्ध अकाउंट्स
जांच में सामने आया है कि 20 जुलाई से 23 जुलाई के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ कंटेंट अचानक तेजी से फैलाया गया। पुलिस का कहना है कि कई पोस्ट्स को एक साथ अलग-अलग अकाउंट्स से शेयर किया गया, जिससे वे कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच गए। साइबर एक्सपर्ट्स को शक है कि इस दौरान कई फर्जी अकाउंट्स और संदिग्ध विदेशी बॉट नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया, ताकि कंटेंट को ट्रेंड कराया जा सके और ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने के लिए प्रभावित किया जा सके। हालांकि, इस पहलू की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
हिंसा के दौरान पुलिस और मीडिया पर हुआ था हमला
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 से 23 जुलाई के बीच जंतर-मंतर, जनपथ, टॉलस्टॉय मार्ग और संसद मार्ग पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने रहे। CJP प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर पथराव की घटनाएं सामने आई थीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती करनी पड़ी थी। पुलिस का कहना है कि हिंसा की हर घटना का वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पोस्ट्स के साथ मिलान किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसने भीड़ को उकसाया और हिंसा फैलाने में कौन-कौन शामिल था।
दो हफ्तों से साइबर और फोरेंसिक टीम कर रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें पिछले दो हफ्तों से लगातार डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं। जांच के दौरान वायरल वीडियो, लाइव स्ट्रीम, रील्स, मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है।
इसके अलावा, संदिग्ध अकाउंट्स की लोकेशन, लॉगिन हिस्ट्री, डिवाइस डिटेल और IP एड्रेस की जानकारी जुटाने के लिए Meta, Google और X से तकनीकी सहयोग मांगा गया है। पुलिस का मानना है कि इन जानकारियों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंटेंट भारत से पोस्ट किया गया था या इसके पीछे किसी विदेशी नेटवर्क की भूमिका थी।
हर पहलू की होगी जांच
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। यदि जांच में यह साबित होता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से हिंसा भड़काने के लिए किया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य कानूनी धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है और सोशल मीडिया कंपनियों से मांगी गई जानकारी का इंतजार है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

