शनिवार को जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का अंदाज कुछ अलग नजर आया। सदर क्षेत्र के पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बेहरिन में पहुंचे जिलाधिकारी ने केवल स्कूल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण नहीं किया, बल्कि कुछ समय के लिए खुद शिक्षक की भूमिका भी निभाई। वह बच्चों के बीच पहुंचे, बोर्ड संभाला और कक्षा में पढ़ाने लगे। जिलाधिकारी को अपने बीच शिक्षक के रूप में देखकर बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया।
जिलाधिकारी ने कक्षा में बच्चों के साथ सहज तरीके से बातचीत शुरू की। उन्होंने भारत का नक्शा बनाकर विद्यार्थियों से देश के अलग-अलग हिस्सों, राज्यों और सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। सवालों का सिलसिला आगे बढ़ा तो बच्चों ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब देना शुरू किया। कई बच्चों ने बिना झिझक हाथ उठाकर सवालों के उत्तर दिए। सही जवाब मिलने पर जिलाधिकारी ने बच्चों की खुलकर सराहना की और उनका उत्साह बढ़ाया।
बच्चों से संवाद में परखी उनकी समझ
जिलाधिकारी का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं था कि बच्चे किताबी सवालों के जवाब दे पा रहे हैं या नहीं, बल्कि वह यह समझना चाहते थे कि बच्चे अपनी जानकारी को कितने आत्मविश्वास के साथ सामने रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सवाल पूछने, अपनी बात रखने और नई चीजों को समझने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों से बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि पढ़ाई का मतलब केवल किताबों को याद करना नहीं है। किसी भी विषय को समझने, उसके बारे में सवाल करने और अपनी जिज्ञासा को बनाए रखने की आदत बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे पढ़ाई के साथ-साथ अपने आसपास की दुनिया को भी समझने की कोशिश करें और हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करें।
उन्होंने बच्चों को अपने भविष्य के सपनों के बारे में भी सोचने और उन्हें लक्ष्य बनाकर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। जिलाधिकारी ने कहा कि आत्मविश्वास और लगातार सीखने की इच्छा सफलता की राह को आसान बनाती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि किसी सवाल का जवाब न आने पर घबराने के बजाय उसके बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए।
‘डीएम की पाठशाला’ से बच्चों में दिखा उत्साह
जिलाधिकारी का यह सहज अंदाज विद्यालय के बच्चों को काफी पसंद आया। आमतौर पर अधिकारी स्कूलों में निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं और अभिलेखों की जानकारी लेते हैं, लेकिन यहां जिलाधिकारी ने बच्चों के बीच बैठकर उनसे सीधे संवाद किया। इससे विद्यालय का माहौल भी कुछ देर के लिए एक अलग ही उत्साह में नजर आया।
बच्चों ने भी जिलाधिकारी के सवालों का जवाब देने में काफी रुचि दिखाई। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों की उन्होंने प्रशंसा की और अन्य बच्चों को भी आगे बढ़कर सवालों का जवाब देने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर उत्साह साफ नजर आया।
शिक्षकों को भी दिए जरूरी निर्देश
बच्चों से बातचीत के बाद जिलाधिकारी ने विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की पढ़ाई, उनकी उपस्थिति और कक्षा में सीखने के माहौल के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्कूल में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी डर के सवाल पूछ सकें और अपनी जिज्ञासा को खुलकर सामने रख सकें।
जिलाधिकारी ने शिक्षकों से बच्चों में रचनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उनके अंदर वैज्ञानिक सोच, तर्क करने की क्षमता और नई चीजों को समझने की आदत विकसित की जानी चाहिए। पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यवहारिक बनाने पर भी जोर दिया गया।
बच्चों के साथ बैठकर अधिकारियों ने खाया मध्याह्न भोजन
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ मौजूद अधिकारियों ने विद्यालय में बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन की भी जानकारी ली। जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ बच्चों के बीच बैठकर भोजन किया। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और साफ-सफाई को भी देखा गया।
अधिकारियों ने यह भी जानकारी ली कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन मिल रहा है या नहीं और भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता का कितना ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों से बातचीत कर उनसे भोजन की गुणवत्ता के बारे में भी जानकारी ली गई।
बेहतर और सुरक्षित माहौल देने पर जोर
विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को स्कूल में बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने साफ-सफाई, शैक्षिक संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूल ऐसा स्थान बने जहां बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को भी विकसित कर सकें।


