दिल्ली-NCR में मानसून इस बार अगस्त की शुरुआत में ही अपना असर दिखाने लगा है। राजधानी और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुक्रवार को दिल्ली के कई हिस्सों में इतनी तेज बारिश हुई कि कई जगह सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। वाहन पानी में फंस गए, ट्रैफिक की रफ्तार थम गई और आम लोगों के साथ-साथ इमरजेंसी सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी खराब मौसम का असर देखने को मिला और कई उड़ानें देरी से चलीं। एयरलाइंस ने यात्रियों को घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी है।
दिल्ली के कई इलाकों में 100 मिमी से ज्यादा बारिश
शुक्रवार को दिल्ली के कई मौसम केंद्रों पर एक दिन में 100 मिमी से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। पुष्प विहार में सबसे ज्यादा 111.5 मिमी, जबकि छतरपुर में 104.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।इतनी कम समय में हुई भारी बारिश ने दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम की भी परीक्षा ले ली। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। कुछ जगहों पर गाड़ियां बंद हो गईं और लोगों को पानी के बीच से निकलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों और रोजाना सफर करने वालों को खास तौर पर परेशानी हुई। कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सामान्य से कहीं ज्यादा समय लोगों को ट्रैफिक में बिताना पड़ा।
अगस्त के सिर्फ सात दिन में बारिश का आधे से ज्यादा कोटा पूरा
दिल्ली में अगस्त के शुरुआती सात दिन ही मौसम के लिहाज से बेहद खास रहे हैं। 1 से 7 अगस्त के बीच राजधानी में करीब 127 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। दिल्ली में अगस्त महीने की सामान्य बारिश करीब 233.1 मिमी मानी जाती है। यानी महीने के सिर्फ एक हफ्ते में ही सामान्य मासिक बारिश का आधे से ज्यादा हिस्सा पूरा हो चुका है।
मौसम के आंकड़ों के मुताबिक यह स्थिति 2011 के बाद अगस्त की शुरुआत में बारिश के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में शामिल है। पिछले साल भी अगस्त में दिल्ली में 400 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन इस साल महीने की शुरुआत में ही बारिश ने तेज रफ्तार पकड़ ली है।
नोएडा में भी बारिश का असर
दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और NCR के दूसरे इलाकों में भी बारिश का असर देखने को मिला। नोएडा में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश के चलते नोएडा के कई इलाकों में भी जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई। खासकर निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हुई।
एयरपोर्ट पर उड़ानों पर पड़ा असर
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी खराब मौसम का असर दिखाई दिया। बारिश और खराब मौसम की वजह से कई उड़ानें प्रभावित हुईं और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा। इंडिगो और स्पाइसजेट की ओर से भी यात्रियों को मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचने की सलाह दी गई। एयरलाइंस ने यात्रियों से कहा कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान से जुड़ी ताजा जानकारी जरूर देख लें। यानी जिन लोगों को शुक्रवार को फ्लाइट पकड़नी थी, उनके लिए मौसम ने सफर का प्लान भी बिगाड़ दिया।
3,500 किलोमीटर तक फैली बादलों की लंबी पट्टी
दिल्ली-NCR में हुई भारी बारिश के पीछे सिर्फ स्थानीय मौसम नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर बने मानसूनी सिस्टम का भी असर बताया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक चीन से लेकर उत्तर और मध्य भारत तक करीब 3,500 किलोमीटर लंबी बादलों की पट्टी बनी हुई है। यह सामान्य बादल नहीं हैं, बल्कि मानसून से जुड़े बड़े सिस्टम का हिस्सा हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार कई सक्रिय मानसूनी सिस्टम के ऊपर उठने वाली गर्म और नमी वाली हवा जब ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचती है तो वहां बड़े स्तर पर बादलों का निर्माण होता है। ऊपरी क्षोभमंडल में पहुंचकर ये बादल हजारों किलोमीटर लंबी पट्टी का रूप ले सकते हैं।यही वजह है कि इस समय एशिया के एक बड़े हिस्से में मानसूनी गतिविधियां एक साथ दिखाई दे रही हैं।
INSAT-3DS से मिली मानसून की दुर्लभ तस्वीर
एशिया के ऊपर फैली इस विशाल मानसूनी पट्टी की तस्वीर भारत के मौसम उपग्रह INSAT-3DS से भी सामने आई है। तस्वीर में चीन से लेकर भारत के उत्तरी और मध्य हिस्सों तक बादलों का एक बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है। इस तस्वीर को मौसम वैज्ञानिकों के लिए खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि एशियाई मानसून किस बड़े क्षेत्र में सक्रिय है और अलग-अलग मौसम प्रणालियां किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
देश के 47 फीसदी जिलों में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश
दिल्ली में भले ही इस समय बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी हो, लेकिन पूरे देश की तस्वीर इससे थोड़ी अलग है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 से 7 अगस्त के बीच देश के 47 फीसदी जिलों में बारिश सामान्य से कम या बहुत कम रही। आंकड़ों के मुताबिक करीब 43 फीसदी जिलों में सामान्य से कम और लगभग 4 फीसदी जिलों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई। वहीं करीब 37 फीसदी जिलों में बारिश सामान्य रही।
लगभग 11 फीसदी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, जबकि सिर्फ करीब 4 फीसदी जिलों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे साफ है कि देश में मानसून का वितरण हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ इलाकों में लगातार भारी बारिश हो रही है तो कई दूसरे हिस्से अब भी सामान्य से कम बारिश का सामना कर रहे हैं।
आगे भी राहत के साथ बढ़ सकती है परेशानी
दिल्ली-NCR में हुई बारिश ने एक बार फिर शहर के ड्रेनेज सिस्टम, ट्रैफिक मैनेजमेंट और जलभराव की समस्या को सामने ला दिया है। बारिश के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन इलाकों में होती है जहां पानी की निकासी की व्यवस्था कमजोर है। फिलहाल लोगों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को जलभराव वाली सड़कों से बचने और बिना जरूरत पानी भरे रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली की इस बारिश ने यह भी दिखा दिया है कि मानसून सिर्फ तापमान कम करने और मौसम सुहाना बनाने तक सीमित नहीं है। जब कुछ घंटों में 100 मिमी से ज्यादा बारिश हो जाए तो राजधानी जैसी बड़ी सिटी की सड़कें, ट्रैफिक और एयर ट्रांसपोर्ट—सब इसकी चपेट में आ जाते हैं।


