धारचूला: भारत-नेपाल सीमा पर छोटे कारोबार को लेकर हालात अब व्यापारियों की चिंता बढ़ाने लगे हैं। धारचूला के व्यापारियों का कहना है कि नेपाल की ओर से भारतीय सामान ले जाने पर भंसार (कस्टम) के नाम पर सख्ती किए जाने की वजह से नेपाली ग्राहक अब भारतीय बाजार आने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर सीमांत इलाके के कारोबार पर पड़ रहा है।

धारचूला का नेपाल रोड बाजार कभी नेपाली ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार रहता था। सुबह से शाम तक दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी, लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है। बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही। कई दुकानदार पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते नजर आते हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नेपाल में भारतीय सामान लेकर जाने वाले लोगों से पूछताछ की जा रही है। कई बार सामान जब्त करने और अतिरिक्त शुल्क वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसी डर की वजह से नेपाली ग्राहकों ने भारतीय बाजार का रुख कम कर दिया है। इसका असर सबसे ज्यादा उन दुकानदारों पर पड़ा है जिनका कारोबार सीमा पार से आने वाले ग्राहकों पर टिका था।
व्यापारी खुशाल सिंह धामी बताते हैं कि पहले उनकी दुकान पर रोजाना 5 से 10 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब मुश्किल से 1500 से 2000 रुपये का कारोबार हो पा रहा है। उनका कहना है कि अगर यही हाल रहा तो छोटे व्यापारियों के लिए दुकान चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।
सब्जी के थोक व्यापारी मोहम्मद अकरम भी इसी परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि नेपाली ग्राहक बड़ी संख्या में सब्जियां खरीदते थे, लेकिन अब बिक्री करीब आधी रह गई है। इससे न सिर्फ व्यापारियों बल्कि किसानों और सप्लाई से जुड़े लोगों पर भी असर पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि परेशानी सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है। दूध, दही, पनीर, कपड़े, मिश्री, गुड़ और रोजमर्रा के कई सामानों की बिक्री भी प्रभावित हुई है। सीमा पार खरीदारी कम होने से बाजार की रौनक फीकी पड़ गई है।
धारचूला और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के बीच सालों से सामाजिक और आर्थिक रिश्ते रहे हैं। दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे के यहां खरीदारी, व्यापार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आते-जाते रहे हैं। ऐसे में अगर छोटे स्तर का यह कारोबार प्रभावित होता है तो इसका असर हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर पड़ सकता है।
व्यापारियों ने अपनी समस्या को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है। उनका कहना है कि अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। वे चाहते हैं कि भारत और नेपाल के संबंधित अधिकारी आपस में बातचीत कर ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
यह भी पढ़ें: NTA की सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में
इधर, लगातार घटते कारोबार से नाराज कुछ व्यापारियों ने चेतावनी भी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे विरोध के तौर पर सख्त कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अधिकांश व्यापारियों का कहना है कि उनका मकसद किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है। वे सिर्फ चाहते हैं कि सीमा पार छोटे व्यापार को पहले की तरह आसान बनाया जाए ताकि दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।
फिलहाल धारचूला के बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही। दुकानें खुली हैं, लेकिन ग्राहकों की कमी साफ नजर आती है। अब सबकी नजर प्रशासन और दोनों देशों के अधिकारियों पर है कि आखिर इस समस्या का हल कब निकलता है और सीमा पर कारोबार की पुरानी रफ्तार कब लौटती है।
यह भी पढ़ें: Ravi Tamta का अद्भुत इनोवेशन
रिपोर्ट: नीरज सिंह, धारचूला/ मानवी शर्मा


