नई दिल्ली: भारतीय वेटलिफ्टिंग की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एक बार फिर इतिहास रच दिया। रविवार रात उन्होंने अपने करियर का तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। यह उनके कॉमनवेल्थ गेम्स करियर का चौथा पदक है। हालांकि, इस बार की जीत सिर्फ एक और गोल्ड मेडल नहीं थी। मीराबाई के लिए यह जीत कई महीनों की मेहनत, दबाव, संघर्ष और उस दर्द का जवाब थी, जिसे उन्होंने चुपचाप सहते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।

मीराबाई चानू

गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब मीराबाई पोडियम पर खड़ी हुईं, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। आमतौर पर बेहद शांत और मजबूत नजर आने वाली मीराबाई उस पल भावुक हो गईं। उनके चेहरे पर जीत की खुशी थी, लेकिन आंखों में संघर्ष की पूरी कहानी दिखाई दे रही थी। बाद में बातचीत के दौरान मीराबाई ने अपने आंसुओं को लेकर कहा कि ये आंसू सिर्फ मेडल जीतने की खुशी के नहीं थे। उनके मुताबिक, उन्होंने उन तमाम मुश्किलों और चुनौतियों को याद करते हुए आंसू बहाए, जिनसे वह पिछले लंबे समय से गुजरती रही थीं।

‘ये मेरे करियर का सबसे मुश्किल गोल्ड था’
मीराबाई चानू ने इस जीत को अपने करियर की सबसे कठिन जीतों में से एक बताया। गोल्ड मेडल तक पहुंचने के लिए उन्हें सिर्फ वजन उठाने की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि अपने वजन को तय सीमा में बनाए रखना भी बेहद मुश्किल था। प्रतियोगिता से पहले लगातार तीन दिनों तक उन्होंने बेहद सीमित खाना खाया और खुद को डिहाइड्रेटेड रखा, ताकि वह अपनी कैटेगरी के निर्धारित वजन के अंदर रह सकें। यह किसी भी एथलीट के लिए आसान नहीं होता।

‘ये मेरे करियर का सबसे मुश्किल गोल्ड था’

शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है, लेकिन वजन घटाने के लिए खाने-पीने पर नियंत्रण रखना पड़ता है। मीराबाई ने बताया कि प्रतियोगिता खत्म होने के बाद भी वह तुरंत आराम नहीं कर पाईं। गोल्ड जीतने के बाद उन्हें अनिवार्य डोप टेस्ट की औपचारिकताओं से गुजरना पड़ा। इसके बाद जाकर उन्हें कुछ समय मिला, जब वह अपनी जीत को महसूस कर सकीं।

तीन दिन तक ठीक से खाना नहीं खाया, जीत के बाद सबसे पहले पानी की इच्छा हुई
मीराबाई की जीत के बाद उनकी बातचीत का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। जब उनसे पूछा गया कि वह इस समय कहां हैं और क्या कर रही हैं, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह अभी डाइनिंग हॉल में नहीं हैं, बल्कि प्रतियोगिता स्थल पर ही मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से उन्होंने ठीक से खाना नहीं खाया था।

तीन दिन तक ठीक से खाना नहीं खाया, जीत के बाद सबसे पहले पानी की इच्छा हुई

ऐसे में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनकी सबसे पहली इच्छा कुछ स्वादिष्ट खाने की नहीं, बल्कि पानी पीने की थी। मीराबाई ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह अभी सिर्फ पानी पीना चाहती हैं और थोड़ी देर बाद जाकर डिनर करेंगी। उनके इस जवाब ने यह दिखा दिया कि एक खिलाड़ी के लिए मेडल जीतने के पीछे कितनी बड़ी शारीरिक और मानसिक कीमत चुकानी पड़ती है।

पोडियम पर भावुक हुईं मीराबाई, आंसुओं ने बयां की पूरी कहानी
मीराबाई चानू को आमतौर पर एक बेहद अनुशासित और मजबूत खिलाड़ी के तौर पर देखा जाता है। बड़े से बड़े मुकाबले में भी वह खुद पर नियंत्रण बनाए रखती हैं। लेकिन इस बार गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनका भावुक होना हर किसी का ध्यान खींच गया। पोडियम पर खड़ी मीराबाई की आंखों से आंसू निकल रहे थे। यह पल उनके प्रशंसकों के लिए भी बेहद भावुक था।

पोडियम पर भावुक हुईं मीराबाई, आंसुओं ने बयां की पूरी कहानी

एक ऐसी खिलाड़ी, जिसने वर्षों तक ट्रेनिंग, चोट, वजन प्रबंधन और प्रतियोगिता के दबाव को झेला, उस रात अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकीं। मीराबाई ने बाद में बताया कि उनके आंसू सिर्फ उस एक जीत के लिए नहीं थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सफर में जो कुछ सहा, जिन कठिन परिस्थितियों से गुजरीं और जिन चुनौतियों का सामना किया, उन सबका भाव उस पल बाहर आ गया।

तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड, चौथा पदक
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। 2026 में जीता गया यह गोल्ड मेडल उनके करियर का तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड है। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं में अपना चौथा पदक भी जीत चुकी हैं। मीराबाई की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक भारतीय वेटलिफ्टिंग की उम्मीदों का भार अपने कंधों पर उठाया है।

तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड, चौथा पदक

जब भी भारत को बड़े मंच पर पदक की उम्मीद होती है, मीराबाई का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लेकिन इस जीत को हासिल करना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। वजन की चुनौती, शरीर पर पड़ने वाला दबाव, प्रतियोगिता का तनाव और जीत की उम्मीद, इन सभी के बीच उन्होंने खुद को संभाला और आखिरकार पोडियम के शीर्ष स्थान पर पहुंचीं।

‘गोल्ड जीतने के बाद भी तुरंत जश्न नहीं मना पाई’
अक्सर किसी बड़े टूर्नामेंट में गोल्ड जीतने के बाद खिलाड़ी अपने साथियों और परिवार के साथ जश्न मनाते हैं। लेकिन मीराबाई का इस बार का अनुभव थोड़ा अलग रहा। जीत के तुरंत बाद उन्हें डोप टेस्ट के लिए जाना पड़ा। मतलब, जिस पल का इंतजार उन्होंने महीनों तक किया, उस पल के बाद भी उनके लिए औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी था।

‘गोल्ड जीतने के बाद भी तुरंत जश्न नहीं मना पाई’

डोप टेस्ट के बाद जब उन्हें थोड़ी राहत मिली, तब जाकर उन्होंने अपने अनुभव और भावनाओं के बारे में बात की। उनके जवाबों में थकान भी थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा संतोष था। उन्होंने साफ तौर पर माना कि यह जीत उनके लिए बेहद कठिन थी और इसी वजह से इस गोल्ड का भावनात्मक महत्व भी बहुत ज्यादा है।

मीराबाई की जीत सिर्फ मेडल नहीं, संघर्ष की कहानी है
मीराबाई चानू की कहानी सिर्फ एक एथलीट के गोल्ड मेडल जीतने की कहानी नहीं है। यह उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने कई बार खुद को मुश्किल परिस्थितियों में साबित किया है। वजन कम करने से लेकर शरीर को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने तक, हर कदम पर उन्हें अनुशासन और धैर्य की जरूरत होती है। तीन दिनों तक सीमित भोजन और पानी के साथ रहना किसी भी इंसान के लिए बेहद कठिन हो सकता है, लेकिन एक खिलाड़ी को यह सब इसलिए करना पड़ता है क्योंकि कुछ ग्राम का अंतर भी प्रतियोगिता का नतीजा बदल सकता है।

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यही वजह है कि जब मीराबाई पोडियम पर खड़ी होकर रोईं, तो उनके आंसुओं में सिर्फ जीत की खुशी नहीं थी। उसमें वर्षों की मेहनत, दर्द, त्याग, दबाव और खुद को बार-बार साबित करने की कहानी छिपी थी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू का यह गोल्ड भारतीय खेल जगत के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।

‘गोल्ड जीतने के बाद भी तुरंत जश्न नहीं मना पाई’

लेकिन खुद मीराबाई के लिए यह मेडल शायद इसलिए और खास रहेगा, क्योंकि उन्होंने इसे अपने शब्दों में अपने करियर की सबसे कठिन जीतों में से एक बताया है। और शायद इसी वजह से गोल्ड जीतने के बाद जब उनसे पूछा गया कि वह क्या करना चाहती हैं, तो उनका जवाब भी बिल्कुल सीधा और मानवीय था—पहले पानी पीना है, फिर आराम से डिनर करना है।

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