शुभेंदु अधिकारी के रुख को लेकर कहा जा रहा है कि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से प्रेरित होकर आगे बढ़ रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध और सड़कों पर नमाज अदा करने पर रोक जैसे कदमों को इसी दिशा में देखा जा रहा है। इन फैसलों को लेकर बंगाल में शुरुआत में कुछ विरोध भी देखने को मिला, खासकर मुस्लिम समुदाय की ओर से, लेकिन बाद में स्थिति में बदलाव के संकेत मिले। बताया जा रहा है कि इसी तरह के कुछ अन्य फैसलों पर भी विचार किया जा रहा है या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया चल रही है।
शुभेंदु अधिकारी भले ही आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन उनके रुख को लेकर कहा जा रहा है कि वे बंगाल के लिए एक वैकल्पिक शासन मॉडल जैसा दृष्टिकोण पेश कर रहे हैं, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है। इसके पीछे एक वजह यह भी बताई जा रही है कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में लिए गए कई फैसलों से एक वर्ग में असंतोष और असहमति की भावना बनी रही, लेकिन खुलकर विरोध कम दिखाई देता था। अब राजनीतिक माहौल बदलने के साथ शुभेंदु अधिकारी पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों में बदलाव या उन्हें पलटने की बात करते नजर आ रहे हैं। इनमें तुष्टीकरण से जुड़ी बताई जाने वाली नीतियों और घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी उनका रुख शामिल बताया जा रहा है।
योगी की तरह ले रहे हैं फैसले
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बनाया। इस दिशा में उन्होंने सख्त कार्रवाई का रास्ता अपनाया, जिसमें प्रभावशाली और रसूखदार अपराधियों पर भी बिना किसी रियायत के कार्रवाई करना शामिल रहा। इसके साथ ही अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई और तेज पुलिस कार्रवाई जैसे कदमों को भी उनकी नीति का हिस्सा बताया जाता है। अपराधियों के खिलाफ सख्ती बढ़ने के बाद कई मामलों में मुठभेड़ों की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे अपराधियों में भय का माहौल बनने की बात कही जाती है। इसी तरह की सख्त कानून-व्यवस्था की रणनीति को लेकर अब बंगाल की राजनीति में भी चर्चा हो रही है, जहां शुभेंदु अधिकारी के रुख को इसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है।
बकरीद के अवसर पर पशुओं की कुर्बानी की परंपरा के तहत कई जगह गोवंश के वध को लेकर विवाद रहता है। आज़ादी के बाद से इस पर रोक लगाने से जुड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक कारणों से इनके सख्त पालन पर अलग-अलग राज्यों में स्थिति भिन्न रही है। बंगाल में लंबे समय से पशु तस्करी और गोवंश से जुड़े मामलों को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं। अब इस मुद्दे पर सख्ती बढ़ाने की बात कही जा रही है, जिसके तहत गोवंश के वध को अपराध की श्रेणी में लाने और खुले में कुर्बानी पर रोक लगाने जैसे कदमों का उल्लेख किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी बकरीद के दौरान गोवंश वध पर सख्त नियम लागू हैं। इस पूरे विषय को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस और असंतोष की स्थिति बनी रहती है।
लाउडस्पीकरों पर सख्ती, प्रशासन ने कसी नकेल
शुभेंदु अधिकारी के रुख को लेकर कहा जा रहा है कि वे योगी आदित्यनाथ की नीतियों की तर्ज पर आगे बढ़ रहे हैं। इसमें धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक और सड़कों पर नमाज अदा करने पर प्रतिबंध जैसे कदम शामिल बताए जा रहे हैं। इस तरह के फैसलों को लेकर बंगाल में शुरुआती दौर में विरोध भी सामने आया, लेकिन बाद में स्थिति में कुछ नरमी के संकेत दिखे। बताया जा रहा है कि इसी तरह के अन्य प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है या उन्हें लागू करने की दिशा में काम चल रहा है, जिनका केंद्र धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे हैं।
घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन
शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ के हाथों सौंपने का पुलिस और आरपीएफ को बंगाल सरकार ने निर्देश दिया है. शुभेंदु कहते हैं कि जेल में रख कर करदाताओं का पैसा बर्बाद नहीं करेंगे. सीधे उनके देश वापस भेजा जाएगा. बुलडोजर और एनकाउंटर का सिलसिला तो यूपी-बिहार की तरह सरकार बदलते ही बंगाल में शुरू हो गया है. बंगाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठिए हैं, यह बात तो ममता बनर्जी भी कभी कहती थीं. लेकिन, अब तो उनके सुर ही बदल गए हैं. वे नहीं माऩतीं कि बंगाल में कोई घुसपैठिया है.


