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हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के बीच मुख्यमंत्री सुक्खू की कैबिनेट बैठक को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है। हिमाचल प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों के बीच एक राजनीतिक विवाद सामने आया है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुक्रवार को हुई राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस मामले में बीजेपी ने सीधे राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है।

BJP ने चुनावों के बीच हुई हिमाचल कैबिनेट बैठक को बताया MCC उल्लंघन 

मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण और जनता के लिए लाभकारी फैसलों को मंजूरी दी गई। इसमें सबसे बड़ा फैसला ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के तहत उन महिलाओं को मासिक 1,500 रुपये पेंशन देने का है, जिनके परिवार की सालाना आय 2 लाख रुपये से कम है।

इसके अलावा बैठक में अन्य अहम निर्णय भी लिए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • चंडीगढ़ के पास नया शहर ‘हिम चंडीगढ़’ बसाने का प्रस्ताव।
  • पूरे राज्य में सभी दुकानों को 24 घंटे खोलने की अनुमति।
  • मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल से बढ़ाकर 63 साल करना।
  • मिड-डे मील वर्कर्स, एसएमसी शिक्षक, मल्टी-टास्क वर्कर्स और पंचायत चौकीदारों के वेतन में 500 रुपये की वृद्धि।
  • सिलाई शिक्षकों के मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी।
  • इन फैसलों का मकसद प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता और सुविधा प्रदान करना है

हिमाचल में चुनाव से पहले कैबिनेट फैसलों पर BJP का विरोध

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने बीजेपी के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने बताया कि कैबिनेट में जिन योजनाओं को मंजूरी दी गई, वे पहले से चल रही योजनाएं हैं और इसमें कोई नई घोषणा नहीं की गई।

संसदीय कार्य और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ये फैसले बजट से जुड़े सामान्य प्रशासनिक कार्य थे। उन्होंने बताया कि चुनाव आचार संहिता के कारण इन निर्णयों का कोई आधिकारिक प्रेस नोट या प्रचार नहीं किया गया। उनका कहना था कि पंचायत चुनाव लंबी प्रक्रिया है, लेकिन जरूरी प्रशासनिक और न्यायिक फैसलों को रुकने नहीं दिया जा सकता।

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