मुख्यमंत्री के अनुसार कपिल मिश्रा कांवड़ समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि विधायक अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल व उमंग बजाज को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा के लिए कांवड़ समिति का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति व कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को बतौर सदस्य इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक व बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि कपिल मिश्रा को कांवड़ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि विधायक अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को समिति के सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि कांवड़ यात्रा सिर्फ एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, सामाजिक सामंजस्य और जनता की आस्था का बड़ा उत्सव है। उन्होंने यह भी कहा कि सावन के महीने में दिल्ली की सड़कों पर शिवभक्तों का यह विशाल सैलाब देश में सांस्कृतिक एकता की झलक पेश करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाएं अब केवल औपचारिक प्रशासनिक काम नहीं रह गई हैं, बल्कि यह सेवा, श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बन चुकी हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रत्येक कांवड़िए को अतिथि की तरह देवतुल्य सम्मान मिले और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने बताया कि कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में बनी यह नई समिति जल्द ही दिल्ली के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। इस बैठक में यात्रा मार्गों के प्रबंधन, वॉटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार ने पिछले वर्षों की तुलना में शिवभक्तों की सेवा के लिए इस बार और अधिक व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में राजधानी में जहां केवल 170 कांवड़ शिविरों को अनुमति दी गई थी, वहीं 2025 में आसान प्रक्रिया और सुविधाजनक मंजूरी के चलते यह संख्या बढ़कर 374 पंजीकृत शिविरों तक पहुंच गई। इन शिविरों के संचालन के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रणाली को समाप्त कर दिया है और सीधे डीबीटी के माध्यम से 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है, जिसमें 50 प्रतिशत राशि अग्रिम रूप से दी गई। इसके अलावा, पंजीकृत शिविरों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थायी कनेक्शन के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत छूट जैसी राहत भी दी गई है, ताकि आयोजकों पर वित्तीय बोझ कम हो सके।


