DelhiNews: एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में निजी बिल्डर, औद्योगिक इकाइयां और अन्य लोग नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध तरीके से भूजल का दोहन कर रहे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कथित अवैध भूजल दोहन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश भूजल विभाग को शिकायत की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने कहा है कि यदि जांच में अवैध रूप से संचालित ट्यूबवेल या बोरवेल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

बिल्डर, उद्योग और अन्य पर भूजल दोहन के गंभीर आरोप, NGT में सुनवाई जारी
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई क्षेत्रों में निजी बिल्डर, उद्योग और अन्य लोग अवैध रूप से भूजल का दोहन कर रहे हैं। विशेष रूप से नोएडा के सेक्टर-145 और 153 तथा ग्रेटर नोएडा के टेक जोन स्थित सेक्टर-94 और 150 का उल्लेख किया गया था।
लगातार भेजी जा रहीं शिकायत पर नहीं हो रही कार्रवाई

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने अधिकरण को बताया कि अवैध भूजल दोहन रोकने के लिए लगातार केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

एनजीटी ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि सबसे पहले इस मामले में सक्षम प्राधिकारी, यानी उत्तर प्रदेश भूजल विभाग के समक्ष विस्तृत शिकायत और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए। अधिकरण ने याचिकाकर्ता को ऐसा करने की अनुमति देते हुए मूल याचिका का निस्तारण कर दिया।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन कर हो कार्रवाई

एनजीटी ने निर्देश दिया कि शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश भूजल विभाग मामले की विधिसम्मत जांच कराए, मौके पर सत्यापन करे और यदि कोई ट्यूबवेल या बोरवेल अवैध रूप से संचालित पाया जाता है तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए उचित कार्रवाई करे।

अधिकरण ने यह पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने को कहा है। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अवैध भूजल दोहन के मामलों पर प्रशासनिक निगरानी और सख्ती बढ़ सकती है।

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