KolkataNews: कोलकाता के ताराताला में गोदाम ढहने से नौ लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख और घायलों को 1 लाख रुपये सहायता देने का एलान किया। वहीं, गोदाम मालिक समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को कोलकाता के तारातला इलाके में हुए हादसे पर चर्चा हुई। इस दर्दनाक घटना में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सदन में जानकारी देते हुए कहा कि गोदाम ढहने की इस घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।सरकार ने हादसे को गंभीर मानते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने का भरोसा भी दिया है।

हादसे के कारणों पर CM शुभेंदु का बयान: जांच के बाद ही साफ होगी पूरी सच्चाई

कोलकाता में ढहे गोदाम के भवन से जुड़ी जरूरी अनुमति के पहलू पर सीएम शुभेंदु ने कहा, रिकॉर्ड पर उपलब्ध भवन के नक्शे पर कोलकाता के पूर्व महापौर और तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

गोदाम हादसा: मालिक गिरफ्तार, जांच तेज

कोलकाता की घटना पर मुख्यमंत्री का बयान काफी अहम है। खासकर उन गंभीर आरोपों को देखते हुए, जो गोदाम के मालिक शंभूनाथ बेहरा पर लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने कोलकाता नगर निगम के पिछले तृणमूल कांग्रेस-शासित बोर्ड के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोदाम अवैध रूप से बनवाया था। शंभूनाथ बेहरा को गुरुवार की सुबह कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पूछताछ के लिए बुधवार रात हिरासत में लिए गए तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनमें गोदाम का सुपरवाइजर मोहम्मद गुलजार, लेबर कॉन्ट्रैक्टर मोहम्मद अतायुल और सुभाष चौधरी शामिल हैं।

पहले ही पत्र लिखकर किया था आगाह
इसके साथ ही सीपीएम की ट्रेड यूनियन शाखा से जुड़ी पोर्ट ट्रस्ट की वर्कर्स यूनियन ने गोदाम के निर्माण को लेकर सवाल उठाए थे। यूनियन ने 11 जून को एक पत्र के जरिए अधिकारियों को आगाह भी किया था कि इस गोदाम से किसी हादसे का खतरा हो सकता है। यूनियन के अनुसार, इस निर्माण में मुख्य रूप से कुख्यात माफिया असगर शामिल था। वहीं, पोर्ट ट्रस्ट अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्माण की अनुमति निगम अधिकारियों ने दी थी, इसलिए किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि की जांच करना उनकी जिम्मेदारी थी।

 

 

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