वडनगर का एक छोटा सा रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म पर आती-जाती ट्रेनें और यात्रियों के बीच चाय बेचता एक बच्चा। शायद उस वक्त किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही बच्चा आगे चलकर देश की राजनीति का सबसे चर्चित चेहरा बनेगा। नाम था नरेंद्र दामोदरदास मोदी। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। करीब सात दशक की जिंदगी में उन्होंने ऐसे कई पड़ाव देखे, जिन्होंने उनकी पहचान बनाई। साधारण परिवार से निकलकर संगठन में काम करने से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से होकर गुजरा है। लेकिन मोदी की कहानी सिर्फ सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं है। इसमें बचपन की जिम्मेदारियां हैं, लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने का दौर है, राजनीतिक संघर्ष हैं, बड़ी जीत हैं और ऐसे फैसले भी हैं जिन पर देश में जमकर बहस हुई।
नरेंद्र मोदी का जन्म दामोदरदास मोदी और हीराबेन मोदी के घर हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से साधारण था। उनके पिता रेलवे स्टेशन के पास चाय बेचते थे। मोदी के जीवन की सबसे चर्चित बातों में उनका बचपन में चाय बेचने का अनुभव भी शामिल है। वह पिता के साथ चाय की दुकान पर काम करते थे। यही वजह है कि बाद के राजनीतिक जीवन में भी ‘चाय’ उनके सार्वजनिक संवाद का हिस्सा बनी रही। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ‘चाय पर चर्चा’ अभियान ने उनकी इसी कहानी को देशभर में चुनावी संवाद का हिस्सा बना दिया। एक छोटे शहर के इस बच्चे की जिंदगी में आगे बहुत कुछ बदलने वाला था।
नरेंद्र मोदी की जिंदगी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका काफी पहले शुरू हो गई थी। किशोरावस्था में वह संघ से जुड़े और आगे चलकर प्रचारक के तौर पर काम किया। प्रचारक की जिंदगी आसान नहीं होती। लगातार यात्रा करना, अलग-अलग लोगों से मिलना, संगठन का काम संभालना और कार्यकर्ताओं के बीच रहना उनके जीवन का हिस्सा बन गया। यही दौर था जब उन्होंने गुजरात के अलग-अलग हिस्सों को करीब से देखा। लोगों की समस्याओं को समझने और संगठन को जमीन पर मजबूत करने का अनुभव उन्हें यहीं मिला। राजनीति में आने से पहले पर्दे के पीछे किया लंबा काम आज नरेंद्र मोदी को लोग बड़े मंचों पर भाषण देते हुए देखते हैं, लेकिन राजनीति के शुरुआती वर्षों में उनका ज्यादातर काम पर्दे के पीछे था। उन्होंने बीजेपी संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। चुनावों की रणनीति, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और संगठन को मजबूत करने जैसे कामों में उनकी भूमिका बढ़ती गई। 1990 के दशक तक वह पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने लगे थे।
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके लिए यह बड़ा बदलाव था। अब तक संगठन के लिए काम कर रहे मोदी के सामने पहली बार सीधे एक राज्य की सरकार चलाने की जिम्मेदारी थी। गुजरात में उनके लंबे कार्यकाल के दौरान उद्योग, निवेश, बिजली, सड़क और बुनियादी ढांचे को लेकर कई योजनाओं पर काम हुआ। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ जैसे निवेश सम्मेलन उनके कार्यकाल की पहचान बने। लेकिन इसी दौर में उनके सामने सबसे कठिन राजनीतिक और कानूनी सवाल भी आए।
2002 के गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी की सरकार और उनकी भूमिका पर देशभर में तीखी बहस हुई। विपक्ष और आलोचकों ने उनकी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि मोदी और उनके समर्थकों ने आरोपों को खारिज किया। इस मुद्दे को लेकर वर्षों तक राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया चली। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई जांच और बाद की न्यायिक प्रक्रिया में मोदी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं पाए जाने की बात सामने आई। इसके बावजूद 2002 का अध्याय उनकी राजनीतिक यात्रा का ऐसा हिस्सा रहा, जिस पर आज भी अलग-अलग राजनीतिक नजरिए देखने को मिलते हैं।
मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2012 में वह लगातार तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2013 में बीजेपी ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। और फिर आया 2014 का चुनाव। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा पड़ाव था। वडनगर से शुरू हुआ सफर अब दिल्ली के प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका था। उनके चुनाव अभियान का एक बड़ा संदेश था, विकास, रोजगार और मजबूत नेतृत्व। सोशल मीडिया और बड़े जनसभाओं के इस्तेमाल ने भी उनके चुनाव प्रचार को अलग पहचान दी।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सरकार ने कई बड़े फैसले और योजनाएं शुरू कीं। जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आयुष्मान भारत जैसे कार्यक्रम सरकार के प्रमुख अभियानों में रहे। 2016 में नोटबंदी का फैसला लिया गया। अचानक 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने के फैसले ने पूरे देश को प्रभावित किया। सरकार ने इसे काले धन और नकली नोटों के खिलाफ कदम बताया, जबकि विपक्ष और अर्थशास्त्रियों के एक वर्ग ने इसके आर्थिक असर पर सवाल उठाए।
2017 में GST लागू हुआ, जिसने देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया।
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलीं और नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। दूसरे कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक बदलाव, कोरोना महामारी, कृषि कानून और उनके खिलाफ हुए किसान आंदोलन जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। किसान आंदोलन के लंबे विरोध के बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की विदेश यात्राएं और दूसरे देशों के नेताओं के साथ उनकी मुलाकातें भी लगातार चर्चा में रहीं। अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और खाड़ी देशों समेत कई देशों के साथ भारत के रिश्तों को लेकर उनकी सरकार ने सक्रिय कूटनीति पर जोर दिया। G20 की भारत में मेजबानी और भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। वहीं विदेश नीति और कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष की ओर से सरकार की रणनीति को लेकर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर सिर्फ चुनावी जीत की कहानी नहीं है। कोरोना महामारी के दौरान देश को स्वास्थ्य संकट के साथ आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। लॉकडाउन, प्रवासी मजदूरों का पलायन, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार की आलोचना हुई। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन भी केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना। महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। यानी जिस नेता ने कई चुनावों में बड़ी जीत हासिल की, उसे अपने फैसलों को लेकर विरोध और आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
नरेंद्र मोदी की निजी दिनचर्या भी अक्सर चर्चा में रहती है। वह योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बताते रहे हैं। किताबें पढ़ने और लिखने में भी उनकी रुचि रही है। उनकी सार्वजनिक छवि हमेशा व्यस्त रहने वाले नेता की रही है। लंबे भाषण, लगातार यात्राएं, बैठकों का सिलसिला और चुनावी दौरों के बीच उनकी कार्यशैली पर अक्सर चर्चा होती है। उनकी जिंदगी का एक और पहलू आध्यात्मिक यात्राओं से जुड़ा रहा है। युवावस्था में हिमालय जाने और आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित होने की बातें उनके जीवन से जुड़े संस्मरणों में मिलती हैं।
17 सितंबर 2026 को नरेंद्र मोदी 76 साल के हो गए हैं। आज उनके जन्मदिन पर बीजेपी और उनके समर्थक देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उनके समर्थकों के लिए यह दिन उनके संघर्ष और राजनीतिक उपलब्धियों को याद करने का मौका है। वहीं राजनीतिक विरोधी उनके फैसलों और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। नरेंद्र मोदी की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं हुई थी। वडनगर के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने संगठन में वर्षों तक काम किया, गुजरात की राजनीति में अपनी जगह बनाई और फिर देश के प्रधानमंत्री बने। रेलवे स्टेशन की चाय की दुकान से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक का यह सफर करीब सात दशकों की जिंदगी में फैला हुआ है। इसमें संघर्ष है, मेहनत है, सत्ता है, विवाद हैं, जीत है और आलोचना भी। यही वजह है कि नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा आज भी देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रिपोर्ट- मानवी शर्मा


