कैलाश मानसरोवर यात्रा: दीपक और मधु आहूजा, भारतीय मूल के अमेरिकी दंपती, कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे। वे तिब्बत के सागा क्षेत्र में अपने समूह के साथ थे, जहां उन्होंने सद्गुरु से भी मुलाकात की। फिर वे नेपाल की ओर रवाना हुए। यहाँ ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ आई और मलबे के कारण उनसे संपर्क टूट गया। इस खबर से परिवार और दोस्तों की चिंता बढ़ गई है। अभी बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन उनकी स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
दीपक और मधु आहूजा आखरी बार सागा में देखे गए थे। वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए एक समूह के साथ गए थे। तिब्बत के सागा में उन्होंने सद्गुरु से भी मिलने का मौका पाया। फिर समूह नेपाल की ओर बढ़ा। किसी को नहीं पता था कि इनके रास्ते में ऐसी तबाही आ जाएगी। कहा जाता है कि दंपती से संपर्क ग्यिरोंग इमिग्रेशन पोर्ट के पास टूट गया। यह जगह तिब्बत और नेपाल के बीच यात्रियों के लिए एक मुख्य रास्ता है।
बुधवार सुबह सीमा क्षेत्र में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। पहाड़ों से मिट्टी, पत्थर और पानी इतनी तेजी से नीचे आए कि लोगों को समय नहीं मिला। बाढ़ और मलबे ने सड़क और पुल नुकसान पहुंचाया। कई जगह रास्ते बंद हो गए। बचाव दल भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस हादसे में कई परिवार अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें दीपक और मधु के परिवार भी शामिल हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर इस प्राकृतिक आपदा ने काफी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 177 शव मिले हैं, जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं। लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की भी संख्या है। शुरुआत में करीब 300 भारतीयों के लापता होने की सूचना मिली थी, जिनमें कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल थे। राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है, और जानकारी मिलने के साथ आंकड़ों में बदलाव हो रहा है।
इस हादसे ने सद्गुरु के साथ कैलाश यात्रा पर गए लोगों को भी प्रभावित किया है। उनका समूह भी इसी रास्ते से नेपाल लौट रहा था, और कुछ लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंस गए। सद्गुरु की ओर से भी कुछ सदस्यों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लापता यात्रियों के परिवार लगातार अधिकारियों से संपर्क कर उनकी स्थिति जानने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल में सेना, पुलिस और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन पहाड़ी इलाका, खराब मौसम और मलबा बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है। कई रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव टीमों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में समय लग रहा है। दीपक और मधु के परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। बचाव दल की तलाश जारी है, और हर गुजरते घंटे के साथ परिवार किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।
जिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन और आध्यात्मिक यात्रा के लिए इस सफर शुरू किया था, उनके लिए यह हादसा बेहद दर्दनाक है। अब उनके परिवार सिर्फ अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का इंतजार कर रहे हैं।


