NewDelhi : अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के ऐलान से वैश्विक स्तर पर राहत का माहौल बना है। इस समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक पहल क्षेत्र में स्थिरता और शांति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच जारी संवाद से बाकी मतभेद भी दूर होंगे और एक स्थायी तथा व्यापक समझौता सामने आएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और व्यापारिक परिवहन की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होना वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी ने खुशी जताते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और कई देशों को नुकसान उठाना पड़ा। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह समझौता पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा, साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच शेष मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए निकलेगा और भविष्य में एक स्थायी एवं व्यापक समझौते का रास्ता खुलेगा।

अमेरिका-ईरान तनाव खत्म करने पर सहमति, शांति समझौते का एलान

प्रधानमंत्री मोदी की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद सामने आई। ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है। समझौते के तहत अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अपनी नाकेबंदी हटाएगा, जबकि ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा। ईरान ने भी इस समझौते की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने और वैश्विक व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हस्ताक्षर होंगे। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के एलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में उत्साह देखा गया। एशियाई बाजारों में आज वृद्धि दर्ज की गई और कच्चे तेल के दाम भी वैश्विक स्तर पर कम हुए हैं। जिससे हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।

शांति समझौते के बाद इस्राइल का रुख सख्त, बढ़ी वैश्विक चिंता

हालांकि चिंताजनक बात ये है कि इस्राइल ने इस शांति समझौते का विरोध किया है। इस्राइल के सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर ने कहा है कि यह समझौता इस्राइल पर लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इस्राइल एक आजाद और संप्रभु राष्ट्र है और वह अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करेगा। उन्होंने कहा कि इस्राइल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई भी बाहरी समझौता उसके निर्णयों को नियंत्रित नहीं कर सकता। उनके अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से ऊपर इस्राइल की सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा है। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने की कीमत इस्राइल को कई बार चुकानी पड़ी है।
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