रामनगर के प्रसिद्ध ढिकुली क्षेत्र में स्थित एक रिजॉर्ट में जन्मदिन का जश्न मनाने पहुंचे एक परिवार के लिए यह अनुभव बेहद डरावना साबित हुआ। गाजियाबाद में तैनात क्षेत्राधिकारी (CO) प्रीति अपने परिवार के साथ जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यहां आई थीं। समारोह के दौरान जब केक काटा गया और परिवार ने उसे खाया, तो कुछ ही देर बाद बच्चों सहित परिवार के कई सदस्यों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पीड़ितों के अनुसार, केक खाते ही उन्हें उल्टी और घबराहट महसूस होने लगी।

केक में मिले कीड़े और फफूंद

पीड़ित पक्ष का यह गंभीर आरोप है कि केक दिखने में तो सामान्य लग रहा था, लेकिन जब उसे खाया गया, तो उसमें फफूंद (Mold) और कीड़े साफ तौर पर दिखाई दिए। इस खुलासे ने न केवल समारोह में मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया, बल्कि रामनगर स्थित रिजॉर्ट की स्वच्छता व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े और नामी रिजॉर्ट में परोसे गए इस दूषित केक ने खाद्य सुरक्षा के मानकों की पोल खोलकर रख दी है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद उन्होंने तुरंत मदद के लिए 112 नंबर पर दो बार कॉल किया, लेकिन पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची। पुलिस की इस देरी से नाराज होकर परिवार ने सीधे कोतवाली पहुंचकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए रिजॉर्ट प्रबंधन के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद पर्यटकों के बीच भी सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई

सूचना मिलते ही रामनगर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम हरकत में आई और रिजॉर्ट का निरीक्षण किया। विभाग ने केक के अवशेषों और वहां मौजूद अन्य खाद्य सामग्रियों के नमूने सील कर दिए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला (Lab) भेजा गया है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि केक में वास्तव में क्या मिला था और यह कितना हानिकारक था। यदि जांच में रिजॉर्ट दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिजॉर्ट प्रबंधन का पक्ष और सफाई

विवाद बढ़ने के बाद रामनगर स्थित रिजॉर्ट प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा कि यह केक उन्होंने स्वयं नहीं बनाया था, बल्कि इसे एक बाहरी विक्रेता से मंगाया गया था। प्रबंधन ने दावा किया है कि वे इस पूरे मामले की आंतरिक जांच करवा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि होटल या रिजॉर्ट में आने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है। बाहरी वेंडर का नाम लेकर वे अपनी जवाबदेही से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकते।

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स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सावधानी

रामनगर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि किसी भी समारोह में बाहर से मंगवाए गए खाने की गुणवत्ता कितनी महत्वपूर्ण होती है। अक्सर लोग केक या अन्य मिठाइयों को बिना जांचे-परखे खिला देते हैं, जो विशेषकर बच्चों के लिए घातक हो सकता है। यदि आप भी किसी आयोजन के लिए बाहर से खाद्य सामग्री मंगवा रहे हैं, तो उसकी पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी और भंडारण की स्थिति पर नजर जरूर रखें।

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कानून और आगे की कार्यवाही

रामनगर पुलिस और खाद्य विभाग दोनों ही इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरत रहे हैं। एसएसपी ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों को उचित दंड मिल सके। कानून के जानकारों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट या दूषित सामग्री परोसना एक संज्ञेय अपराध है, जिसमें भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई हो सकती है। पीड़ित परिवार फिलहाल अपनी सेहत में सुधार की प्रतीक्षा कर रहा है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

रिपोर्ट-सोनू सिंह @Nation27

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