उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में जल्द ही आधुनिक एसी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इसके तहत नोएडा में ई-बस सेवा को और विस्तारित करते हुए इसे जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के शहरी परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 18 प्रमुख शहरों में 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह बसें जीसीसी (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) मॉडल के तहत संचालित की जाएंगी। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने बताया कि प्रदेश के 17 नगर निगमों के साथ-साथ नोएडा में भी वातानुकूलित ई-बसों का संचालन किया जाएगा। खास बात यह है कि नोएडा में इस सेवा को जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। सरकार का मानना है कि नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहरों में यातायात व्यवस्था मजबूत होगी, लोगों को आरामदायक सफर मिलेगा और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी। इसके अलावा कैबिनेट ने सरकारी अधिवक्ताओं के शुल्क और भत्तों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। बैठक में कुल 25 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से 24 प्रस्तावों को स्वीकृति मिल गई। हालांकि परिवहन विभाग से जुड़ा एक प्रस्ताव फिलहाल मंजूरी हासिल नहीं कर सका।
जिला पंचायत के प्रस्ताव मंजूर, क्षेत्र में शुरू होंगे नए विकास कार्य
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने उन विकास परियोजनाओं को बड़ी राहत दी है, जिन्हें 31 मार्च 2026 तक जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृति मिल चुकी थी और जो अब विकास प्राधिकरणों के क्षेत्राधिकार में आ गई हैं। सरकार ने ऐसी सभी परियोजनाओं के नियमितीकरण (रेग्युलराइजेशन) को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत विकास प्राधिकरण इन परियोजनाओं को वैध रूप से नियमित करेंगे, जबकि भविष्य में इनसे संबंधित नक्शों और निर्माण अनुमतियों को भी वही स्वीकृत करेंगे। हाल के वर्षों में प्रदेश में कई विकास प्राधिकरणों का विस्तार हुआ है, जिसके कारण अनेक परियोजनाएं ऐसी स्थिति में आ गई थीं जिनकी मंजूरी जिला पंचायतों ने दी थी, लेकिन वे अब प्राधिकरण क्षेत्रों के अंतर्गत आ गई हैं। कैबिनेट के इस फैसले से ऐसी परियोजनाओं पर बनी अनिश्चितता खत्म होगी और उन्हें कानूनी मान्यता मिल सकेगी। साथ ही विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी आसानी होगी।
सरकारी वकीलों का भत्ता बढ़ा
इसके अलावा अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ताओं (एडीजीसी) की मासिक रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये कर दी गई है, जबकि उनकी प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से बढ़कर 2,300 रुपये हो जाएगी। कैबिनेट ने प्रदेश के महाधिवक्ता के मानदेय में भी वृद्धि को मंजूरी दी है। अब उन्हें 75,000 रुपये की जगह 1.25 लाख रुपये मासिक रिटेनरशिप मिलेगी, जबकि प्रति सुनवाई फीस 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से अधिवक्ताओं को बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा और न्यायालयों में प्रदेश का पक्ष और अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा।
मक्का की MSP बढ़ी
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने किसानों, जेल प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। प्रदेश में मक्का की सरकारी खरीद 5 जून से 31 जुलाई तक की जाएगी, जिसके लिए विभिन्न जिलों में खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने जेलों से संबंधित नई मुआवजा नीति को भी मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के अनुसार यदि जेल में कैदियों के बीच विवाद के दौरान किसी बंदी की मृत्यु होती है तो उसके परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसी तरह चिकित्सा सुविधा या जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण होने वाली मौत पर भी 5 लाख रुपये की सहायता राशि मिलेगी। वहीं, आत्महत्या की स्थिति में 3 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के पांच जिलों में नई जेलों के निर्माण को भी स्वीकृति दे दी है। इससे मौजूदा जेलों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में नए रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई है।


