E20 विवाद: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुए छात्र आंदोलन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के अभियान ने देश की राजनीति में एक अलग तरह की चर्चा छेड़ दी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब एक और नया संगठन सुर्खियों में आ गया है। खुद को ‘E20 जनता पार्टी’ बताने वाले इस नए समूह ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
E20 जनता पार्टी की मुख्य मांग है कि देश में वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीदने का विकल्प दिया जाए। संगठन का कहना है कि जिन लोगों को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना है, उन्हें अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही संगठन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
CJP के अभियान से मिली प्रेरणा
E20 जनता पार्टी का यह अभियान ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी का NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभियान चर्चा में है। CJP के लगातार विरोध प्रदर्शनों और छात्र मुद्दों को लेकर बनाए गए माहौल के बाद अब E20 जनता पार्टी ने भी अपने मुद्दे को लेकर सार्वजनिक अभियान शुरू किया है। संगठन का दावा है कि जिस तरह CJP ने शिक्षा व्यवस्था और NEET विवाद को लेकर छात्रों की आवाज को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया, उसी तरह E20 जनता पार्टी भी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाना चाहती है।
क्या है E20 पेट्रोल का मुद्दा?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इसके पीछे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना जैसे तर्क दिए जाते हैं। हालांकि, इस नीति को लेकर कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों की ओर से सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।
खासकर पुराने वाहनों के इंजन पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन के संभावित असर, माइलेज में बदलाव और वाहन के रखरखाव से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। इसी को आधार बनाते हुए E20 जनता पार्टी का कहना है कि हर उपभोक्ता को अपनी जरूरत और वाहन के हिसाब से ईंधन चुनने का अधिकार होना चाहिए।
‘100% पेट्रोल का विकल्प क्यों नहीं?’
E20 जनता पार्टी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी वाहन मालिक को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना है, तो उसे 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीदने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा सकता? संगठन का कहना है कि देश में अलग-अलग उम्र और तकनीक वाले लाखों वाहन चल रहे हैं। नए वाहनों और पुराने वाहनों की ईंधन जरूरतें अलग हो सकती हैं।
ऐसे में सभी वाहनों के लिए एक ही तरह के ईंधन को अनिवार्य बनाना उपभोक्ताओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को साफ तौर पर यह विकल्प दिया जाए कि वे E20 पेट्रोल लें या फिर 100 प्रतिशत पेट्रोल।
नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग
अपने अभियान को और अधिक राजनीतिक रंग देते हुए E20 जनता पार्टी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग भी की है। संगठन का तर्क है कि सड़क परिवहन और वाहनों से जुड़े मामलों में सरकार को आम लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि E20 जनता पार्टी को व्यापक राजनीतिक समर्थन कितना मिल पाता है। लेकिन सोशल मीडिया और सार्वजनिक अभियानों के जरिए संगठन ने अपने मुद्दे को चर्चा में लाने की कोशिश शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर भी गरमाया मुद्दा
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग सरकार की एथेनॉल नीति का समर्थन कर रहे हैं और इसे देश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं। वहीं, कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें पेट्रोल की गुणवत्ता और अपने वाहन के लिए उपयुक्त ईंधन चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। यही विरोधाभास अब E20 जनता पार्टी के अभियान का आधार बन गया है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए विकल्प और पारदर्शिता की मांग करना है।
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क्या यह नया संगठन बनेगा बड़ी राजनीतिक आवाज?
कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान के बाद एक और मुद्दा-आधारित संगठन का सामने आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सोशल मीडिया और जन आंदोलनों के जरिए नए राजनीतिक मंच तेजी से उभर रहे हैं। हालांकि, CJP और E20 जनता पार्टी की विचारधारा, मुद्दे और राजनीतिक प्रभाव अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों ही संगठनों ने युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।
अब देखना होगा कि E20 जनता पार्टी का यह अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर देशभर में पेट्रोल और एथेनॉल नीति को लेकर कोई बड़ा जन आंदोलन खड़ा कर पाता है। फिलहाल संगठन ने साफ कर दिया है कि उसकी लड़ाई ‘ईंधन चुनने की आजादी’ और 100 प्रतिशत पेट्रोल के विकल्प को लेकर है।
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