Hormuz Crisis: मध्य पूर्व यानी वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हुई है। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। हालांकि फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की सप्लाई पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है।ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने आयात के स्रोतों में काफी विविधता लाई है। रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल आने के साथ-साथ इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे देशों से भी लगातार सप्लाई हो रही है। इसी वजह से अभी तत्काल किसी बड़े संकट जैसी स्थिति नहीं बनी है। Hormuz Crisis
क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में गिना जाता है। खाड़ी के कई बड़े तेल उत्पादक देशों का तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो उसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है या समुद्री मार्ग पर सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ जाते हैं, तो पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। Hormuz Crisis
फिलहाल भारत की तेल सप्लाई सुरक्षित
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक अभी भारत को मिलने वाले कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। रूस से लगातार तेल आ रहा है, जबकि दूसरे देशों से भी तय कार्यक्रम के अनुसार शिपमेंट पहुंच रहे हैं। भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) भी मौजूद है, जिससे किसी अचानक आई आपात स्थिति में कुछ समय तक जरूरत पूरी की जा सकती है। इसके अलावा सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है। Hormuz Crisis
LPG और LNG पर बढ़ सकता है दबाव
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो सबसे ज्यादा असर एलपीजी (रसोई गैस) और एलएनजी (प्राकृतिक गैस) की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में समुद्री रास्तों में बाधा आने या जहाजों की आवाजाही महंगी होने पर गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका असर घरेलू गैस सिलेंडर, उद्योगों और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। Hormuz Crisis
शिपिंग और बीमा का खर्च बढ़ने की आशंका
तनाव बढ़ने के साथ जहाजों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन जाती है। अगर खतरा बढ़ता है तो शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करती हैं, जिससे बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है।अगर जहाजों को वैकल्पिक और लंबे समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा, तो सामान पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ेगा। इसका असर सिर्फ तेल और गैस ही नहीं बल्कि दूसरे आयात-निर्यात वाले सामान पर भी पड़ सकता है। Hormuz Crisis
तेल की कीमतों पर दुनिया की नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें हमेशा भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होती हैं। अगर वेस्ट एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।हालांकि फिलहाल बाजार में घबराहट जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन निवेशक और ऊर्जा कंपनियां हर घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही हैं। Hormuz Crisis
सरकार भी हालात पर रख रही नजर
केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्रालय लगातार वैश्विक हालात की समीक्षा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत के पास कई देशों से तेल खरीदने का विकल्प मौजूद है और सप्लाई चेन भी सामान्य बनी हुई है।हालांकि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक बना रहता है या किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर देखने को मिल सकता है। फिलहाल भारत की स्थिति स्थिर है, लेकिन आने वाले दिनों में वेस्ट एशिया के हालात पर सबकी नजर बनी रहेगी। Hormuz Crisis


