FIFAWorldCup: फीफा वर्ल्ड कप में बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले से पहले ईरान के कोच आमिर गलेनोई ने मेजबान अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और टीम स्टाफ के साथ भेदभाव किया जा रहा है, कई लोगों के वीजा आवेदन खारिज किए जा रहे हैं और यात्रा से जुड़े कड़े प्रतिबंधों के कारण टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फीफा वर्ल्ड कप में बेल्जियम के खिलाफ अपने दूसरे मैच से ठीक पहले ईरान के मुख्य कोच आमिर गलेनोई ने मेजबान देश अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोच का कहना है कि यात्रा प्रतिबंधों और वीजा देने से इनकार कर अमेरिकी प्रशासन उनकी टीम के साथ लगातार अनुचित व्यवहार कर रहा है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि फीफा अगले हफ्ते तक अमेरिकियों को इन कड़े नियमों में ढील देने के लिए मना लेगा। कोच गलेनोई ने कहा “मुझे बहुत खुशी है कि ईरानी देश हमारे पीछे खड़ा है। हमारे देश के जो शहीद हैं, हम उनके लिए खेलते हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि इस तरह के व्यवहार ने हमारे लोगों को ठेस पहुंचाई है। अगर हम अरबों डॉलर भी खर्च कर दें, तो भी हम अपने लोगों को न्याय नहीं दिला पाएंगे। यह सिर्फ यह दिखाता है कि हम एक उत्पीड़ित देश हैं। इसके बावजूद, मुझे उम्मीद है कि हम शांति हासिल करेंगे और उम्मीद है कि वर्ल्ड कप में इस तरह का व्यवहार संस्थागत  नहीं होगा।”

ट्रेनिंग में रुकावट, बेल्जियम की मजबूत चुनौती—ईरान के लिए बढ़ी मुश्किलें!

ईरान की टीम रविवार को बेल्जियम के खिलाफ होने वाले अपने दूसरे मुकाबले से पहले शनिवार को लॉस एंजिल्स क्षेत्र में लौट आई। मजबूत और फीफा रैंकिंग में 10वें स्थान पर काबिज बेल्जियम के खिलाफ इस अहम मैच की तैयारी के दौरान टीम की ट्रेनिंग बीच में ही रोकनी पड़ी। कोच घलेनोई ने बताया कि शुक्रवार को यात्रा के लिए उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया, जिससे टीम को सीमित समय में ही तैयारी करनी पड़ी। उन्होंने कहा, “हमें लॉस एंजिल्स में कम से कम 24 घंटे चाहिए थे, लेकिन हमें 16 घंटे से भी कम समय मिला। इसी वजह से हमें ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर वापस आना पड़ा। इन प्रतिबंधों के कारण हमारी तैयारी काफी प्रभावित हुई है।”

ईरान कोच की अपील “47 अन्य कोच भी उठाएं आवाज, खत्म हों पाबंदियां”

घलेनोई ने वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही अन्य टीमों के कोचों से ईरानी टीम के साथ हो रहे व्यवहार पर खुलकर प्रतिक्रिया देने की अपील की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 47 अन्य कोचों से सवाल साझा किया था, लेकिन अब तक किसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि सिर्फ फुटबॉल है। घलेनोई के मुताबिक, “हम यहां केवल खेल के लिए आए हैं, राजनीति के लिए नहीं। हमारी आपत्ति सिर्फ इस बात को लेकर है कि हमारे साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि सभी कोच अपनी-अपनी टीमों की तैयारियों में व्यस्त हैं और वे किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करते, लेकिन अगर ऐसा व्यवहार किसी और टीम के साथ होता तो वे खुद जरूर आवाज उठाते।

ईरान टीम पर कड़े प्रतिबंध क्यों? घलेनोई ने उठाए यात्रा और वीजा नियमों पर सवाल

ईरानी टीम इन दिनों अमेरिका द्वारा लागू किए गए सख्त यात्रा प्रतिबंधों के बीच खेल रही है, जो 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका की नीतियों के बाद लगाए गए बताए जा रहे हैं। इन नियमों के तहत ‘टीम मेली’ को मैच से सिर्फ एक दिन पहले अमेरिका पहुंचने और मुकाबला खत्म होते ही तुरंत टिजुआना (मेक्सिको) स्थित अपने ट्रेनिंग कैंप लौटने का निर्देश दिया गया है। हालांकि अन्य टीमें भी तंग शेड्यूल में यात्रा करती हैं, लेकिन ईरान के कोच घलेनोई इस व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। टीम ने हाल ही में मेक्सिको से छोटी उड़ान लेकर शनिवार को LA गैलेक्सी स्टेडियम में अभ्यास किया। ईरान के मिडफील्डर सईद एजतोलाही ने भी चिंता जताते हुए कहा कि उनकी परिस्थितियां बाकी टीमों जैसी नहीं हैं। उनके मुताबिक, जहां दूसरी टीमें पूरी तरह तैयारी पर ध्यान दे पा रही हैं, वहीं ईरान को अपना काफी समय लगातार यात्रा और कम्यूटिंग में लगाना पड़ रहा है, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है

बेल्जियम के खिलाड़ी ने जताई सहानुभूति

बेल्जियम के राइट-बैक थॉमस मेनियर ने ईरान टीम की मौजूदा परिस्थितियों पर सहानुभूति जताई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उन्हें रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन की टीम के साथ खेले गए मैचों की याद दिलाती है, जहां हालात खेल से कहीं ज्यादा जटिल थे।मेनियर ने कहा कि आम तौर पर फुटबॉल और राजनीति को अलग रखा जाता है, लेकिन कई बार इन्हें पूरी तरह अलग करना आसान नहीं होता। उनका मानना है कि ऐसे मुश्किल हालात ईरानी खिलाड़ियों को और अधिक प्रेरित कर सकते हैं और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए अतिरिक्त ऊर्जा जुटा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन के खिलाफ नेशंस लीग मुकाबले में भी उन्होंने खिलाड़ियों के भीतर जबरदस्त जुनून और देश के लिए कुछ कर दिखाने की भावना देखी थी। मेनियर के अनुसार, कुछ ईरानी खिलाड़ियों के परिवार भी संघर्ष और तनाव से प्रभावित हो सकते हैं, और ऐसे में उनके प्रति सहानुभूति स्वाभाविक है।

 

 

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