स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज Sachin Siwach ने ऐसा दमदार प्रदर्शन किया कि पूरा देश गर्व से भर उठा। जैसे ही बॉक्सिंग रिंग में रेफरी ने सचिन का हाथ विजेता के तौर पर ऊपर उठाया, हजारों किलोमीटर दूर हरियाणा के भिवानी जिले के मिताथल गांव में जश्न का माहौल बन गया। ऐसा लगा मानो गांव में किसी त्योहार की शुरुआत हो गई हो
रात का समय था, लेकिन सचिन के घर में किसी की आंखों में नींद नहीं थी।

परिवार के सभी सदस्य टीवी स्क्रीन पर नजरें टिकाए बैठे थे। मुकाबला खत्म होते ही जैसे ही भारत के पक्ष में फैसला आया, घर तालियों की गूंज, खुशी के नारों और भावुक चेहरों से भर गया। किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे तो किसी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया।
3-2 से जीता रोमांचक मुकाबला
पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में हवलदार के पद पर तैनात Sachin Siwach का मुकाबला बेहद कड़ा रहा। दोनों मुक्केबाजों के बीच आखिरी राउंड तक जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। हर पंच के साथ मुकाबला और रोमांचक होता गया। आखिरकार निर्णायकों ने 3-2 के बेहद करीबी फैसले से सचिन को विजेता घोषित किया और भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक आ गया।
टीवी के सामने टिकी थीं पूरे परिवार की निगाहें
Sachin Siwach की जीत का सबसे भावुक पल उनके घर में देखने को मिला। पिता अनिल सिवाच, मां सुमन, दादा जैल सिंह, दादा धूप सिंह, दादी सजनी देवी, बहन नेहा, चाचा पवन सिवाच और चाची ऋतु पूरे मुकाबले के दौरान लगातार दुआएं करते रहे। जीत की घोषणा होते ही सभी एक-दूसरे को गले लगाकर रो पड़े। परिवार ने मिठाई बांटी और भगवान का धन्यवाद किया। पिता अनिल सिवाच ने कहा कि बेटे ने वर्षों की मेहनत और संघर्ष का फल आज पूरे देश को दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार की नहीं बल्कि पूरे हरियाणा और भारत की जीत है।

मिताथल गांव में दीपावली जैसा माहौल
Sachin Siwach की जीत की खबर फैलते ही मिताथल गांव में लोग घरों से बाहर निकल आए। युवाओं ने ढोल बजाए, पटाखे छोड़े और मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। गांव के बुजुर्गों ने सचिन की सफलता को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया। देर रात तक गांव की गलियों में भारत माता की जय और सचिन सिवाच जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे।
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बचपन से था मुक्केबाजी का जुनून
परिवार के अनुसार सचिन को बचपन से ही खेलों में गहरी रुचि थी। उन्होंने छोटी उम्र में ही बॉक्सिंग को अपना लक्ष्य बना लिया था। कई बार चोटें लगीं, कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, अनुशासन और सेना में रहते हुए कठिन प्रशिक्षण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
सेना और देश के लिए गर्व का पल
भारतीय सेना में हवलदार के रूप में सेवाएं दे रहे सचिन की इस उपलब्धि पर सेना के साथ-साथ खेल जगत में भी खुशी की लहर है। उनकी जीत को देशभर के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने भारत के लिए गौरव का क्षण बताया।
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युवाओं के लिए बने प्रेरणा
Sachin Siwach की यह जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। भिवानी की मिट्टी से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों के मंच तक पहुंचने वाले सचिन ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो मेहनत एक दिन जरूर रंग लाती है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता गया यह स्वर्ण पदक भारत के पदक अभियान को और मजबूत करने के साथ-साथ हरियाणा की खेल संस्कृति को भी एक नई पहचान दे गया। अब पूरे देश की नजरें उन खिलाड़ियों पर हैं जो आने वाले मुकाबलों में तिरंगे का मान और ऊंचा करने के लिए मैदान में उतरेंगे।


