नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के युवाओं और छात्रों को भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी सिर्फ नौकरी पाने की कोशिश तक सीमित नहीं है, बल्कि अब वह नए कारोबार शुरू करने, रोजगार पैदा करने और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और पारदर्शिता को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली है। इन मुद्दों को लेकर अलग-अलग जगहों पर छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।
परीक्षा सिर्फ कागज नहीं, छात्रों के भविष्य का रास्ता
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं छात्रों के लिए आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का महत्वपूर्ण रास्ता हैं। लाखों युवा वर्षों तक मेहनत और तैयारी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे उनके भविष्य और मेहनत पर असर डालती है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार कर रही है। पेपर लीक और नकल जैसे अनुचित तरीकों को पूरी तरह रोकना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राष्ट्रपति ने साफ संदेश दिया कि छात्रों के वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज की भी बराबर भूमिका है। परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि एक युवा जब किसी परीक्षा की तैयारी करता है तो वह सिर्फ एक पेपर की तैयारी नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने पूरे भविष्य के लिए मेहनत कर रहा होता है।
छात्र आंदोलनों के बीच राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति के इस बयान को हाल के छात्र आंदोलनों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों ने कई बार सिस्टम में बदलाव की मांग उठाई है। छात्रों का कहना रहा है कि परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी से ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों को नुकसान होता है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति ने छात्रों की भूमिका और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रमुखता दी। उनका संदेश यह भी है कि देश की युवा आबादी को केवल आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यही युवा आने वाले वर्षों में देश की दिशा और विकास तय करेंगे।
नौकरी तलाशने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन रहे युवा
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा अब पारंपरिक रूप से सिर्फ सरकारी या निजी नौकरी पाने की दिशा में नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि उद्यमिता और रोजगार सृजन की तरफ भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। देश में बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम इसका बड़ा उदाहरण है। छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से आने वाले युवा भी अपने आइडिया के दम पर कंपनियां शुरू कर रहे हैं और नए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।
टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्वास्थ्य, फाइनेंस, ई-कॉमर्स और दूसरे क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा का असर अब देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रहा है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भारतीय युवाओं की क्षमता, मेहनत और नेतृत्व कौशल पर भरोसा कर रही हैं और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रही हैं।
युवाओं पर जताया भरोसा
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश की नई पीढ़ी में जिस तरह का आत्मविश्वास, प्रतिभा और मेहनत दिखाई दे रही है, उससे भारत के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य को लेकर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। उन्होंने युवाओं को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी। शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप और तकनीक के क्षेत्र में युवा जितना आगे बढ़ेंगे, देश की विकास यात्रा भी उतनी ही मजबूत होगी।
छात्रों के लिए भरोसेमंद सिस्टम जरूरी
राष्ट्रपति के संबोधन का एक अहम संदेश यह रहा कि युवाओं को अवसर देने के साथ-साथ उन अवसरों की प्रक्रिया को भी निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना जरूरी है। यदि कोई छात्र वर्षों तक मेहनत करने के बाद परीक्षा देता है और पेपर लीक या किसी अन्य गड़बड़ी के कारण उसका परिणाम प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल उसकी एक परीक्षा पर नहीं बल्कि उसके आत्मविश्वास और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ता है। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना, पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रपति का संदेश ऐसे समय में युवाओं के लिए उम्मीद और जिम्मेदारी दोनों लेकर आया है। उन्होंने एक तरफ सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही, वहीं दूसरी तरफ युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिया गया यह संदेश साफ करता है कि भारत के अगले दौर की कहानी केवल सरकारों की नीतियों से नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं की मेहनत, सोच और सपनों से भी लिखी जाएगी।

