नई दिल्ली: 26 दिनों तक चले लंबे अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना उपवास खत्म कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज करा रहे वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों, समर्थकों, डॉक्टरों और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में सूप की पहली चुस्की लेकर अपना अनशन समाप्त किया। 26 दिनों तक बिना खाना खाए रहने के बाद जब उन्होंने सूप पिया तो उनके मुंह से निकला- “Hunger tastes better” यानी “भूख में भी स्वाद है।” वांगचुक के अनशन खत्म करने का यह पल भावुक कर देने वाला था। अस्पताल के कमरे में उनके आसपास केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता, डॉक्टर और परिवार के सदस्य मौजूद थे। करीब सात मिनट के एक वीडियो में अनशन खत्म करने से पहले की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई।

सरकार के आश्वासन के बाद खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक ने यह फैसला सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद लिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल में वांगचुक के सामने सरकार का संदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले लोगों और 20 जुलाई 2026 को संसद की ओर मार्च में शामिल हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख रखती है। नड्डा ने यह भी कहा कि सरकार संसद में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का आश्वासन पहले ही दे चुकी है। इसके अलावा हालिया NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले पीड़ितों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के मुद्दे पर भी सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।

वांगचुक ने हाथ पकड़कर जताया आभार
सरकार की ओर से आश्वासन पढ़े जाने के बाद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह का हाथ पकड़कर उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह अपना अनशन खत्म करके खुश और आभारी हैं। इसके बाद उन्होंने सूप की पहली चुस्की ली। 26 दिनों के लंबे उपवास के बाद उनके लिए यह पल बेहद खास था। सूप पीने के बाद उनका छोटा सा वाक्य- “भूख में भी स्वाद है” लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
26 दिनों तक जारी रहा संघर्ष
सोनम वांगचुक का यह अनशन करीब चार सप्ताह तक चला। लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे थे और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई थी। अनशन के दौरान वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों, युवाओं के अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता समेत कई मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाई। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आए और देश के अलग-अलग हिस्सों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा हुई।

पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठी आवाज
वांगचुक के आंदोलन के दौरान परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि वे वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की वजह से उनका भविष्य प्रभावित हो जाता है। वांगचुक ने भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से गंभीरता से कदम उठाने की मांग की। सरकार की ओर से संसद में पेपर लीक और परीक्षा सुधार पर चर्चा के आश्वासन के बाद उनके आंदोलन को लेकर बातचीत का रास्ता खुला।

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अस्पताल में भावुक रहा माहौल
अनशन खत्म करने के दौरान अस्पताल का माहौल काफी भावुक नजर आया। एक तरफ वांगचुक के परिवार और समर्थक उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे, तो दूसरी तरफ 26 दिन बाद उन्हें कुछ लेते देख सभी ने राहत की सांस ली। डॉक्टरों के मुताबिक, इतने लंबे समय तक उपवास के बाद सामान्य भोजन शुरू करना बेहद सावधानी का काम होता है। ऐसे में वांगचुक को चिकित्सकीय निगरानी में धीरे-धीरे भोजन दिया जाएगा, ताकि उनके शरीर पर अचानक अतिरिक्त दबाव न पड़े।

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