नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, लेकिन पहले ही दिन सदन के अंदर और बाहर राजनीतिक माहौल गर्म नजर आया। विपक्षी दलों ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संसद परिसर के बाहर विपक्षी सांसदों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, वहीं लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद हंगामे के कारण सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। मानसून सत्र को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, NEET से जुड़े मुद्दों और अन्य राजनीतिक मामलों पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की है। NEET
25 दिनों तक चलेगा संसद का मानसून सत्र
इस बार संसद का मानसून सत्र कुल 25 दिनों का होगा और इसमें 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की कोशिश की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की है, वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल विधेयक पारित कराने के बजाय जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी सदन में पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की कोशिश करती है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्ष को सहयोग करना चाहिए। NEET
‘वंदे मातरम’ के अपमान को अपराध बनाने वाला विधेयक लाने की तैयारी
मानसून सत्र में सरकार एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने को आपराधिक अपराध बनाने का प्रस्ताव है। इस मुद्दे को लेकर संसद के अंदर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। सरकार का पक्ष है कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्र भावना से जुड़े विषयों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं विपक्ष इस तरह के प्रस्ताव के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठा सकता है। इस विधेयक को लेकर संसद में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि राष्ट्रीय गीत और उससे जुड़े मुद्दे पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। NEET
850 लोकसभा सीटों और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव फिर चर्चा में
मानसून सत्र में सरकार संविधान संशोधन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक भी दोबारा पेश कर सकती है। प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव शामिल है। यह विधेयक इससे पहले अप्रैल में सदन में पारित नहीं हो सका था। अब सरकार इसे दोबारा लाने की तैयारी में है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इसका देश की चुनावी राजनीति और संसद के स्वरूप पर बड़ा असर पड़ सकता है। लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी राय है। ऐसे में इस विधेयक पर संसद में लंबी और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बहस होने की उम्मीद है। NEET
NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को बड़ा मुद्दा बनाया। NEET जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा को लेकर विपक्ष लंबे समय से सरकार पर सवाल उठाता रहा है। विपक्षी दलों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा हो। इसके साथ ही विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों की ओर से ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया गया था। हालांकि पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। NEET
संसद के बाहर प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा
विपक्ष के प्रस्तावित मार्च और प्रदर्शन को देखते हुए संसद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थानों से आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। विपक्ष का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से छात्रों और उनके परिवारों में गुस्सा और चिंता बढ़ी है। NEET
पहले दिन ही हंगामा, लोकसभा दोपहर तक स्थगित
मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध जताया। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। इसके बाद लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। पहले दिन के घटनाक्रम से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। विपक्ष जहां NEET, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। NEET
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के आसार
मानसून सत्र में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ सकते हैं। राष्ट्रीय गीत के अपमान को अपराध बनाने वाला प्रस्ताव, लोकसभा सीटों में संभावित बढ़ोतरी और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं।इसके अलावा NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में संसद का यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। NEET

