NTA: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से अदालत में दाखिल की गई 94 पेज की चार्जशीट में दावा किया गया है कि परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में कई ऐसी कमियां थीं, जिनका फायदा उठाकर पेपर लीक जैसी घटना को अंजाम दिया जा सकता था।
सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान सामने आया कि एनटीए के गोपनीय सेक्शन में आने-जाने वाले विशेषज्ञों और अन्य संबंधित लोगों की नियमित तलाशी (फ्रिस्किंग) नहीं होती थी। यानी जो लोग परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने या उससे जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया का हिस्सा थे, उनके प्रवेश और निकास के दौरान सुरक्षा जांच का कोई सख्त इंतजाम नहीं था।
सीसीटीवी निगरानी भी नहीं थी पूरी तरह मजबूत
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जिस गोपनीय सेक्शन में प्रश्नपत्रों से जुड़ा संवेदनशील काम होता था, वहां गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए अलग से लाइव-फीड सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम मौजूद नहीं था। जांच एजेंसी का मानना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के बावजूद निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, जिससे सुरक्षा में चूक की आशंका बढ़ जाती है।
गोपनीय प्रक्रिया में कई कमियां आने का दावा
सीबीआई ने चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसे सुरक्षित रखने की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल कमजोर पाए गए। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में हर स्तर पर कड़ी निगरानी और जवाबदेही जरूरी होती है, लेकिन जांच के दौरान कई ऐसी व्यवस्थाएं सामने आईं जो अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
लाखों छात्रों का भरोसा हुआ प्रभावित
नीट देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक की घटना और अब सीबीआई की चार्जशीट में सामने आईं सुरक्षा संबंधी खामियां छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाने वाली हैं। कई छात्रों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का मनोबल प्रभावित होता है।
जांच अभी जारी
सीबीआई फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और पेपर लीक से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि सुरक्षा व्यवस्था की इन कथित कमियों का फायदा किस तरह उठाया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।
नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला अब केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बन चुका है। छात्रों की उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा।

