Parliament Street violence: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान संसद मार्ग पर भड़की हिंसा ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और शांति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक जांच और दर्ज FIR के अनुसार, यह उपद्रव छात्रों का स्वतः स्फूर्त आक्रोश नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के इशारे पर रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दी है।
राजनीतिक दलों की भूमिका और FIR का आधार
संसद मार्ग थाने में इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज FIR में आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP) और भीम आर्मी का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन दलों के नेताओं ने 16 मई से 20 जुलाई के बीच लगातार भीड़ को संबोधित किया और उन्हें भड़काने का काम किया। FIR में यह आरोप लगाया गया है कि हिंसा के लिए बाकायदा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई और एक संगठित योजना के तहत सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया।
हिंसा का सुनियोजित खाका
जांच में सामने आया है कि 20 जुलाई की सुबह जब ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया गया, तब असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाने के लिए बेहद हिंसक बयानों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों से कहा गया कि “पुलिसकर्मियों के सिर पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला करें, क्योंकि जीत तभी संभव है जब पुलिस बल को गंभीर चोटें पहुँचें।” इसी भड़काऊ भाषा के बाद भीड़ बेकाबू हो गई और उसने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर दिया।
तकनीकी साक्ष्यों से पुष्ट हुई साजिश
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। अब तक प्राप्त साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने के लिए किया गया एक आपराधिक कृत्य था। पुलिस का दावा है कि उनके पास पर्याप्त डिजिटल और दस्तावेजी प्रमाण हैं जो इन राजनीतिक दलों के नेताओं की संलिप्तता को साबित करते हैं। जल्द ही इन नेताओं को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जा सकते हैं।
गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज
हिंसा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की 15 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। प्रमुख धाराओं का विवरण इस प्रकार है:
| धारा/कानून | अपराध का प्रकार |
|---|---|
| BNS 109 | हत्या का प्रयास |
| BNS 61 | आपराधिक साजिश |
| BNS 191(2,3) | दंगा और घातक हथियारों से लैस होना |
| BNS 181 | गैरकानूनी सभा |
| BNS 121 | सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना |
| आर्म्स एक्ट 25(1AB) | पुलिस का हथियार छीनने का प्रयास |
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, इंस्पेक्टर दिनेश कुमार द्वारा शुरू की गई इस जांच को अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अपने हाथ में ले चुकी है। वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार बनाकर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी घटना का मुख्य सूत्रधार कौन था और इस दंगे के लिए फंड कहाँ से आया था। इस मामले में शामिल किसी भी पक्ष को बख्शने के मूड में न दिख रही पुलिस का कहना है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को कठोर सजा दिलाई जाएगी।


