नई दिल्ली: दीपावली पर अपने घर और परिवार के बीच त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने इस बार सबसे बड़ी परेशानी सफर को लेकर खड़ी हो गई है। दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों से अपने गांव-घर लौटने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन में सीट मिलना मुश्किल हो गया है। कई प्रमुख ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं हैं और बुकिंग पर ‘रिग्रेट’ दिख रहा है। ऐसे में जिन यात्रियों ने हवाई सफर का विकल्प चुना, उन्हें भी राहत नहीं मिली। त्योहार नजदीक आते ही फ्लाइट टिकटों के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। ट्रेन और विमान के बाद अब निजी बसों का किराया भी यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सामान्य दिनों में जिस स्लीपर सीट के लिए करीब 1,600 से 2,000 रुपये खर्च होते हैं, वही सीट दीपावली के आसपास 4,500 से 6,000 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा बसों की स्लीपर सीट के लिए 8,000 रुपये तक किराया दिखाई दे रहा है।
दीपावली के मौके पर दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली-हावड़ा रेल रूट की करीब 28 प्रमुख ट्रेनों में 7 नवंबर के लिए सभी श्रेणियों में ‘रिग्रेट’ की स्थिति बन चुकी है। यानी यात्रियों को टिकट बुक करने का विकल्प भी नहीं मिल रहा। प्रयागराज एक्सप्रेस, वंदे भारत, तेजस, हावड़ा राजधानी, शिवगंगा, पूर्वा, महाबोधि, सीमांचल, स्वतंत्रता सेनानी, हमसफर और अमृत भारत जैसी ट्रेनों में सीटों की मांग काफी बढ़ गई है। त्योहार के दौरान इन ट्रेनों में सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। कई लोग महीनों पहले से दीपावली पर घर जाने की योजना बनाते हैं, लेकिन आखिरी समय में टिकट की तलाश करने वालों के लिए मुश्किल और बढ़ गई है। तत्काल टिकट के लिए भी मारामारी है और सामान्य कोटे में सीटें उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
रेलवे में टिकट नहीं मिलने के बाद बड़ी संख्या में यात्रियों ने फ्लाइट का रुख किया। लेकिन यहां भी किराये ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। 6 नवंबर को दिल्ली से प्रयागराज की उड़ान का किराया 11,500 रुपये से ऊपर पहुंच गया है। मुंबई से दिल्ली या अन्य प्रमुख शहरों के रूट पर भी त्योहार का असर साफ दिखाई दे रहा है। इंडिगो की कुछ उड़ानों का किराया करीब 18 हजार रुपये, जबकि आकासा की उड़ानों में टिकट करीब 16 हजार रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह हैदराबाद के लिए हवाई किराया करीब 17 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बेंगलुरु और भुवनेश्वर जाने वाले यात्रियों को भी करीब 14 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है। सामान्य दिनों में जिन रूटों पर हवाई टिकट कुछ हजार रुपये में मिल जाता है, त्योहार के आसपास वही सफर कई गुना महंगा हो गया है। ऐसे में परिवार के साथ घर जाने की योजना बना रहे लोगों को सफर का बजट दोबारा बनाना पड़ रहा है।
ट्रेन और विमान के बाद यात्रियों के पास निजी बसों का विकल्प बचता है। लेकिन दीपावली के चलते यहां भी किराये में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। सामान्य दिनों में 1,600 से 2,000 रुपये में मिलने वाली स्लीपर सीट का किराया धनतेरस यानी 6 नवंबर को करीब 4,500 रुपये और छोटी दिवाली यानी 7 नवंबर को करीब 6,000 रुपये तक पहुंच गया है। सिर्फ स्लीपर ही नहीं, साधारण सीटिंग बसों का किराया भी बढ़ गया है। कई रूट पर यात्रियों से 3,500 से 4,000 रुपये तक लिए जा रहे हैं। यानी जिन यात्रियों ने ट्रेन का टिकट नहीं मिलने के बाद बस से जाने का फैसला किया, उन्हें भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
ऑनलाइन बस बुकिंग पोर्टल पर भी त्योहार के दौरान किराये में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। श्यामली, ड्रीम क्रूजर और बीएसएस कूल जैसे ऑपरेटरों की कुछ बसों में स्लीपर सीट का किराया करीब 8,000 रुपये तक पहुंच गया है। यात्रियों का कहना है कि परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर जाना जरूरी है, इसलिए महंगा टिकट होने के बावजूद उन्हें सफर करना पड़ रहा है। खासतौर पर वे लोग ज्यादा परेशान हैं जो दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में काम करते हैं और दीपावली पर अपने गृह जिले लौटते हैं। परिवार के साथ त्योहार मनाने की चाह, लेकिन सफर ने बढ़ाई चिंता
दीपावली ऐसा त्योहार है जब दूसरे शहरों में रहने वाले लोग अपने घर लौटना चाहते हैं। नौकरी या पढ़ाई के कारण सालभर परिवार से दूर रहने वाले लोगों के लिए यह मौका खास होता है। यही वजह है कि त्योहार से कुछ दिन पहले ही ट्रेनों, बसों और फ्लाइट्स में सीटों की मांग अचानक बढ़ जाती है। इस बार भी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। जिन लोगों ने पहले से टिकट बुक नहीं किया, उनके सामने अब सीमित विकल्प हैं। ट्रेन में सीट नहीं है, फ्लाइट महंगी है और निजी बसों में भी सामान्य से कई गुना ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। कई यात्री ऐसे भी हैं जो परिवार के कई सदस्यों के साथ सफर करते हैं। ऐसे में अगर एक व्यक्ति का टिकट ही हजारों रुपये महंगा हो जाए तो पूरे परिवार के सफर का खर्च काफी बढ़ जाता है।
यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ परिवहन साधनों में सीटों की मांग बढ़ना सामान्य बात है। दीपावली के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के राज्यों की ओर जाने वाले रूट सबसे ज्यादा व्यस्त रहते हैं। लेकिन इस बार यात्रियों के लिए परेशानी यह है कि विकल्प सीमित होने के कारण उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक साधन चुनने में मुश्किल हो रही है। ट्रेन में जगह नहीं मिलने पर बस या फ्लाइट का विकल्प चुनना पड़ रहा है और दोनों में ही किराया सामान्य दिनों के मुकाबले काफी अधिक है।
दीपावली के लिए अगर किसी यात्री ने पहले से टिकट बुक नहीं कराया है तो आखिरी समय में सस्ता और सुविधाजनक विकल्प मिलना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि लोग अलग-अलग वेबसाइट और ऐप पर लगातार सीट और किराये की जानकारी देख रहे हैं। कुछ यात्री त्योहार के दिन या उससे एक-दो दिन पहले सफर करने के बजाय तारीख बदलकर यात्रा करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जिनकी छुट्टियां तय हैं या जिन्हें हर हाल में तय तारीख पर घर पहुंचना है, उनके पास महंगा टिकट लेने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बच रहे हैं। दीपावली से पहले बढ़ी यह भीड़ यह भी दिखाती है कि त्योहारों के समय बड़े शहरों से अपने घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ जाती है। इस दौरान ट्रेन, बस और विमान, तीनों माध्यमों पर दबाव बढ़ता है और उसका असर यात्रियों की जेब पर भी दिखाई देता है।


