मंडी: जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत ने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर अधिकारियों से कड़ी नाराजगी जताई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने साफ कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं का मकसद सिर्फ फाइलों में काम पूरा दिखाना नहीं, बल्कि उसका फायदा सीधे आम लोगों तक पहुंचाना है। अधिकारियों को निर्देश देते हुए सांसद ने कहा कि बैठकों में दिए गए निर्देशों का असर जमीन पर नजर आना चाहिए।
कंगना रनौत ने अधिकारियों से विभागवार विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कई योजनाओं की मौजूदा स्थिति, काम पूरा होने की समयसीमा और सामने आ रही अड़चनों के बारे में भी सवाल किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी होने पर उसकी वजह स्पष्ट की जाए और समस्या के समाधान के लिए समयबद्ध तरीके से काम किया जाए।
सिर्फ बैठक करने से नहीं बदलेगी स्थिति
सांसद ने बैठक के दौरान अधिकारियों को दो टूक कहा कि दिशा समिति की बैठक महज एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर नहीं रहनी चाहिए। हर बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होती है, उनकी प्रगति अगली बैठक में स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार की योजनाओं का काम वास्तव में उनके क्षेत्र में हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों को लेकर विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। कई बार एक विभाग की अनुमति या कार्रवाई में देरी के कारण दूसरे विभाग का काम भी अटक जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम किया जाए।
लापरवाही पर रिपोर्ट भेजने की चेतावनी
कंगना रनौत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी परियोजना में लगातार देरी होती है या निर्देशों के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ता, तो इसकी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि विकास कार्यों में लापरवाही को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल योजनाओं की जानकारी बैठक में प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और निर्माण कार्य तय मानकों के मुताबिक पूरे हों।
योजनाओं की प्रगति की ली जानकारी
बैठक में विभिन्न विभागों की ओर से चलाए जा रहे विकास कार्यों और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से जुड़ी योजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी। सांसद ने परियोजनाओं से जुड़े आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि कागजों पर काम पूरा दिखाने से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होतीं। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए।
समयसीमा के भीतर काम पूरा करने पर जोर
सांसद ने सभी विभागों को लंबित विकास कार्यों की सूची तैयार करने और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय अड़चनें हैं, उनकी जानकारी समय रहते संबंधित स्तर पर दी जाए ताकि समाधान निकाला जा सके। कंगना रनौत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि योजनाओं की निगरानी लगातार की जानी चाहिए। किसी काम के शुरू होने के बाद उसकी प्रगति पर नजर रखना जरूरी है, ताकि आखिरी समय में काम अधूरा रहने जैसी स्थिति न बने।
जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश
बैठक में जनसमस्याओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सांसद ने अधिकारियों से कहा कि लोगों की शिकायतों को केवल आवेदन या फाइल तक सीमित न रखा जाए। शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि आम जनता सरकारी कार्यालयों में अपनी समस्या लेकर आती है तो उसे बार-बार विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करते हुए शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना चाहिए।
अगली बैठक तक दिखना चाहिए काम
कंगना रनौत ने बैठक के अंत में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब समीक्षा बैठकों में सिर्फ प्रगति रिपोर्ट पेश करने से काम नहीं चलेगा। अगली बैठक तक जिन मुद्दों पर निर्देश दिए गए हैं, उनमें ठोस प्रगति दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता का असली पैमाना फाइलों में दर्ज आंकड़े नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधाएं हैं। अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ काम करना होगा, ताकि क्षेत्र में चल रही परियोजनाएं समय पर पूरी हों और लोगों को उनका लाभ मिल सके।

