रांची: देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और जगह-जगह तिरंगा यात्राएं, देशभक्ति कार्यक्रम और समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी बीच झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस ने अस्पताल में उनके साथ मारपीट की।

महतो के मुताबिक, वह पिछले 14 दिनों से झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को जब उन्होंने अस्पताल से बाहर निकलकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया।

अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश पर विवाद

देवेंद्र नाथ महतो का दावा है कि वह स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होकर तिरंगा यात्रा में हिस्सा लेना चाहते थे। उनका कहना है कि अस्पताल में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बाहर जाने से रोक दिया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। महतो ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके सीने में चोट लगी। उन्होंने कहा कि जिस दिन देश आजादी का जश्न मना रहा है, उसी दिन उन्हें अपनी बात रखने और एक देशभक्ति कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘सिर्फ नाम की आजादी’ बताया।

14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं महतो

JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो लंबे समय से झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं। इन मुद्दों को लेकर वह पिछले 14 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी तबीयत खराब होने की बात सामने आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इसके बावजूद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जताई। महतो का कहना है कि उनका आंदोलन केवल व्यक्तिगत मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, जो सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की उम्मीद रखते हैं।

‘आजादी का मतलब अपनी बात रखने की आजादी भी’

महतो ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने या देशभक्ति के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, आजादी का असली अर्थ यह भी है कि नागरिक अपनी समस्याओं और अधिकारों की बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने या शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से ही रोका जाए तो स्वतंत्रता दिवस के मायने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी है विवाद

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। युवाओं की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय पर नियुक्ति को लेकर है। महतो और उनके समर्थकों की मांग है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

पुलिस के आरोपों पर क्या है स्थिति?

महतो ने पुलिस पर मारपीट करने और उन्हें कार्यक्रम में जाने से रोकने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, इस दौरान उन्हें सीने में चोट भी लगी। हालांकि, इस मामले में पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, स्वतंत्रता दिवस के दिन सामने आए इस घटनाक्रम ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे आंदोलन को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

एक तरफ देशभर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ महतो जैसे आंदोलनकारी अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई जांच होती है या नहीं।

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