594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे इस तरह तैयार किया गया है कि वाहनों में रखी वस्तुएं, यहां तक कि पानी भी सफर के दौरान हिलता-डुलता नहीं है। इसकी डिजाइन और स्पीड ऐसे रखी गई है कि लंबी दूरी का सफर बेहद कम समय में पूरा किया जा सके। इस एक्सप्रेसवे से माल ढुलाई भी काफी आसान हो जाएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल करीब 25 से 30 हजार करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे इस तरह तैयार किया गया है कि वाहनों में रखी वस्तुएं, यहां तक कि पानी भी सफर के दौरान हिलता-डुलता नहीं है। इसकी डिजाइन और स्पीड ऐसे रखी गई है कि लंबी दूरी का सफर बेहद कम समय में पूरा किया जा सके। इस एक्सप्रेसवे से माल ढुलाई भी काफी आसान हो जाएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल करीब 25 से 30 हजार करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है।
गंगा एक्सप्रेसवे: लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास का नया गलियारा
छह लेन वाला गंगा एक्सप्रेसवे, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तार दिया जा सकता है, उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से गुजरते हुए मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। इसे पश्चिमी और पूर्वी यूपी को आपस में जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार, राज्य के भीतर हर साल करीब 24.5 से 26 करोड़ टन माल की ढुलाई होती है, जिसमें अनाज, निर्माण सामग्री और खुदरा वस्तुएं शामिल हैं। वहीं, राज्य से बाहर लगभग 13.5 से 15 करोड़ टन माल भेजा जाता है, जिसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा और कृषि उत्पाद शामिल बताए जाते हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स लागत में 30,000 करोड़ तक की बचत संभव
राज्य के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन और रोज़गार सृजन को गति देकर राज्य की अर्थव्यवस्था में ‘एक नया अध्याय’ लिखेगा. यह एक्सप्रेसवे सिर्फ़ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि एक एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गलियारा है. माल की तेज़ आवाजाही और परिवहन लागत में कमी से सालाना लॉजिस्टिक्स पर 25,000-30,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. उन्होंने बताया कि इस गलियारे के किनारे राज्य को पहले ही लगभग 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. इसके तहत 6,507 एकड़ ज़मीन पर 12 औद्योगिक केंद्र (नोड्स) विकसित किए जा रहे हैं. विनिर्माण, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, भंडार गृह और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों को इससे फ़ायदा होने की उम्मीद है. साथ ही, प्रस्तावित फ़ार्मा, कपड़ा और आईटी पार्क बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा कर सकते हैं.
यूपी की अर्थव्यवस्था में कैसे आएगा बदलाव, गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा गेम चेंजर
इस परियोजना से लंबे समय में राज्य की अर्थव्यवस्था को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उत्तर प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर (एक हजार अरब डॉलर) अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। भविष्य में इस एक्सप्रेसवे को आगे बढ़ाकर उत्तराखंड से जोड़ने की भी योजना है। 29 अप्रैल को इसके उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी और यह परियोजना पांच साल से भी कम समय में पूरी कर ली गई, जो इसे देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे में शामिल करती है। ब्लू डार्ट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी दिपांजन बनर्जी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे पारंपरिक रूटिंग सिस्टम पर निर्भरता कम करके उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से एक ऐसा सीधा और निर्बाध उत्तरी कॉरिडोर की कमी महसूस की जा रही थी, जो एनसीआर क्षेत्र को पूर्वी जिलों से जोड़ सके, और गंगा एक्सप्रेसवे इस कमी को प्रभावी रूप से पूरा करता है।
गंगा एक्सप्रेसवे: आसान और तेज होगी माल ढुलाई प्रक्रिया

