प्रदेश में पशुओं को लम्पी स्किन डिजीज (LSD) से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बीमारी के संभावित खतरे को देखते हुए विभाग ने पशुपालकों से अपने पशुओं की नियमित निगरानी करने और किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।

विभाग का कहना है कि लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करने वाली बीमारी है। समय रहते इसके लक्षणों की पहचान और संक्रमित या संदिग्ध पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखना संक्रमण के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में पशुपालकों को लापरवाही न बरतने और बीमारी के शुरुआती संकेतों पर ही कार्रवाई करने की सलाह दी गई है।

पशुओं में इन लक्षणों पर रखें खास नजर

पशुपालन विभाग के मुताबिक लम्पी स्किन डिजीज होने पर पशुओं में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में तेज बुखार आना प्रमुख संकेतों में शामिल हो सकता है। इसके बाद पशु की त्वचा पर गोल और कठोर गांठें दिखाई देने लगती हैं। इसके अलावा आंखों और नाक से स्राव आना, अत्यधिक लार निकलना, भूख कम होना और पशु का कमजोर पड़ना भी बीमारी के संभावित लक्षण हो सकते हैं।

कुछ मामलों में शरीर और पैरों में सूजन दिखाई दे सकती है। दूध देने वाले पशुओं में दूध का उत्पादन अचानक कम होना भी पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं, कमजोरी के कारण पशु को चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। यदि इनमें से एक या कई लक्षण एक साथ दिखाई दें तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

संदिग्ध पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से करें अलग

विभाग ने पशुपालकों को सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह दी है कि यदि किसी पशु में लंपी रोग जैसे लक्षण नजर आते हैं तो उसे तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग कर दिया जाए। खासकर ऐसे पशु को दूसरे मवेशियों के साथ बांधकर रखने या खुले में उनके बीच छोड़ने से बचना चाहिए। संक्रमित या संदिग्ध पशु को अलग रखने से बीमारी के संभावित प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। पशुपालकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि संदिग्ध पशु के संपर्क में आने वाले स्थान और उपयोग में आने वाले सामान की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बिना डॉक्टर की सलाह के न करें इलाज

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध पशु का इलाज अपनी तरफ से शुरू न करें। सोशल मीडिया या आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर दवाइयां देने से स्थिति बिगड़ सकती है। पशु में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर सबसे पहले उसे अलग करें और फिर पशु चिकित्सक से संपर्क करें। विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही दवा या अन्य उपचार शुरू किया जाना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलने से पशु की स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है और जरूरत के अनुसार उपचार किया जा सकता है।

बीमारी की सूचना तुरंत दें

विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि अगर किसी पशु में लंपी स्किन डिजीज के संदिग्ध लक्षण दिखाई देते हैं तो इसकी जानकारी छिपाएं नहीं और तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। पशुपालक अपने जिले के विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) कार्यालय में सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी पशु चिकित्सालय से भी संपर्क किया जा सकता है। विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई टोल-फ्री हेल्पलाइन 18001805141 पर भी बीमारी से संबंधित सूचना दी जा सकती है।

पशुओं की नियमित निगरानी जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी से बचाव के लिए केवल लक्षण आने के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। पशुपालकों को अपने पशुओं की रोजाना निगरानी करनी चाहिए। पशु के खान-पान, व्यवहार, शरीर के तापमान, दूध उत्पादन और त्वचा की स्थिति में होने वाले बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है। अगर कोई पशु अचानक खाना कम कर दे, सुस्त रहने लगे, दूध कम देने लगे या उसकी त्वचा पर गांठें दिखाई देने लगें तो तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए।

साफ-सफाई और सावधानी से कम हो सकता है खतरा

पशुओं के रहने की जगह की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है। पशुपालकों को गोशाला और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने, गंदगी जमा न होने देने और पशुओं की देखभाल के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को नए या बाहर से लाए गए पशुओं के संपर्क को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए और जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध मामले को छिपाने के बजाय समय पर रिपोर्ट करना बीमारी की रोकथाम के लिए ज्यादा सुरक्षित कदम है।

लापरवाही पड़ सकती है भारी

लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग का अलर्ट ऐसे समय में आया है जब पशुओं की सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। पशुपालकों की थोड़ी सी सतर्कता बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने में मदद कर सकती है। विभाग ने साफ किया है कि पशुपालक घबराएं नहीं, बल्कि जागरूक रहें। पशु में लक्षण दिखाई देने पर उसे अलग करना, विशेषज्ञ से संपर्क करना और समय पर संबंधित विभाग को सूचना देना सबसे जरूरी कदम है।

इसलिए पशुपालकों से अपील है कि वे अपने पशुओं पर रोजाना नजर रखें और त्वचा पर गांठ, तेज बुखार, सूजन, कमजोरी, भूख में कमी या दूध उत्पादन घटने जैसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर उठाया गया एक छोटा कदम पशु को बेहतर देखभाल देने के साथ-साथ दूसरे पशुओं को भी संक्रमण के खतरे से बचाने में मदद कर सकता है।

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