आगरा: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक आगरा पहुंचते हैं। खास मौकों और छुट्टियों के दौरान यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ताजमहल पर बढ़ते पर्यटक दबाव को देखते हुए इसकी धारण क्षमता यानी Carrying Capacity तय कराने की तैयारी में है।
ASI के आगरा सर्किल ने ताजमहल की धारण क्षमता निर्धारित कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर अपने दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज दिया है। इस प्रस्ताव के तहत विशेषज्ञों से अध्ययन कराया जाएगा, जिसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि एक दिन में अधिकतम कितने पर्यटकों को ताजमहल परिसर में प्रवेश दिया जाना उचित होगा।
ताजमहल में हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। पीक सीजन, सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यहां भीड़ और बढ़ जाती है। लगातार बढ़ती भीड़ का असर स्मारक की संरचना, परिसर की व्यवस्था और पर्यावरण पर पड़ने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए ASI अब वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाना चाहता है कि ताजमहल एक दिन में कितने पर्यटकों का दबाव सुरक्षित तरीके से झेल सकता है। Carrying Capacity तय होने के बाद पर्यटकों की संख्या को उसी सीमा के भीतर रखने की दिशा में कदम उठाया जा सकेगा।
ताजमहल की धारण क्षमता निर्धारित करने के लिए IIT दिल्ली की टीम पहले ही मई महीने में ताजमहल का दौरा कर चुकी है। टीम ने स्मारक और उसके आसपास की व्यवस्थाओं को देखा था। हालांकि, IIT दिल्ली से आधिकारिक तौर पर अध्ययन कराने का अंतिम फैसला ASI के दिल्ली मुख्यालय की ओर से लिया जाएगा।
अध्ययन के दौरान पर्यटकों की आवाजाही, स्मारक परिसर में उनके ठहरने का समय, भीड़ का दबाव, उपलब्ध सुविधाएं और स्मारक की सुरक्षा समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। इसके आधार पर विशेषज्ञ यह सुझाव दे सकते हैं कि ताजमहल में रोजाना कितने पर्यटकों को प्रवेश देना स्मारक के दीर्घकालिक संरक्षण के लिहाज से सही रहेगा।
ताजमहल के संरक्षण और उसके आसपास के क्षेत्र को बेहतर तरीके से विकसित करने को लेकर पहले भी कई स्तर पर काम हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली से ताजमहल के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया था। इस दस्तावेज का मकसद ताजमहल को आने वाले वर्षों में सुरक्षित रखने और पर्यटन से जुड़े दबाव को व्यवस्थित करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करना था। इसमें स्मारक के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों की सुविधाओं और आसपास के क्षेत्र से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया था।
ताजमहल के संरक्षण से जुड़े इसी विजन डॉक्यूमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष Central Empowered Committee (CEC) से रिपोर्ट मांगी थी। CEC ने पिछले साल नवंबर में दाखिल अपनी रिपोर्ट में आगरा के सभी प्रमुख स्मारकों की धारण क्षमता निर्धारित कराने का सुझाव दिया था। इस सुझाव के पीछे मुख्य वजह यही थी कि ऐतिहासिक स्मारकों पर लगातार बढ़ रहे पर्यटक दबाव को नियंत्रित किया जा सके। किसी भी ऐतिहासिक इमारत की क्षमता अनंत नहीं होती। रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही से जहां परिसर की व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है, वहीं लंबे समय में स्मारक के संरक्षण के सामने भी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
आगरा में ताजमहल के अलावा भी कई ऐतिहासिक स्मारक हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन बढ़ने के साथ इन स्मारकों पर भीड़ को व्यवस्थित रखना ASI के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। CEC की सिफारिश के बाद आगरा के अन्य स्मारकों की Carrying Capacity तय कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद पर्यटन को रोकना नहीं, बल्कि उसे इस तरह व्यवस्थित करना है कि पर्यटक भी आसानी से स्मारक देख सकें और ऐतिहासिक धरोहरों को भी किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
यह तय नहीं है कि ताजमहल में एक दिन में कितने पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। पहले विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे और उसके बाद उनकी रिपोर्ट के आधार पर क्षमता निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगर Carrying Capacity तय होती है तो भविष्य में पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए टिकटिंग व्यवस्था, समय के स्लॉट या अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसका अंतिम स्वरूप अध्ययन और ASI के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
ताजमहल देश की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। ऐसे में बढ़ते पर्यटन के बीच इसके संरक्षण और पर्यटकों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी माना जा रहा है। अब IIT दिल्ली के संभावित अध्ययन और ASI मुख्यालय के फैसले से यह साफ होगा कि ताजमहल रोजाना कितने पर्यटकों का दबाव सुरक्षित रूप से झेल सकता है।

