विकास के दावों की चमक के पीछे बदइंतजामी की ऐसी तस्वीर सामने आई है। जिसने हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किलों के दलदल में धकेल दिया है। देवरिया जनपद के राम-लक्ष्मण मार्ग पर स्थित बांकीपुल का चौड़ीकरण महीनों से अधूरा पड़ा है। बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। वैकल्पिक मार्ग पानी में डूब चुका है। एंबुलेंस तक रास्ते में फंस रही हैं और स्कूली बच्चे, मरीज, बुजुर्ग व राहगीर हर दिन जोखिम में सफर तय करने को मजबूर हैं।
बांकीपुल हजारों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है। लेकिन पिछले कई महीनों से पुल का चौड़ीकरण अधूरा पड़ा है। बारिश के बाद वैकल्पिक मार्ग भी पानी में डूब गया है। नतीजा यह है कि हर गुजरने वाला व्यक्ति अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले खतरे से गुजरने को मजबूर है।
सबसे ज्यादा परेशानी आस-पास के स्कूली बच्चों, मरीजों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। कई दोपहिया वाहन फिसल चुके हैं। राहगीरों के साथ दुर्घटनाएं होती रहती है। पुल पर जलभराव का सामना करना पड़ता है। सबसे गंभीर तस्वीर तब सामने आई, जब मरीज को लेने जा रही एंबुलेंस भी इसी रास्ते में फंस गई और उसे वापस जाना पड़ा। सवाल उठता है कि अगर आपातकालीन सेवाएं भी बाधित हो जाएं, तो अनहोनी का जिम्मेदार कौन होगा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण शुरू तो कर दिया, लेकिन सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। शिकायतें होती रहीं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते निर्माण कार्य पूरा किया गया होता या सुरक्षित रास्ता बनाया गया होता, तो लोगों को परेशानी नहीं होना पड़ता।
रिपोर्ट- कृष्णा नन्द गुप्ता (देवरिया)/सोनू सिंह

