मुरादाबाद की ज़िला कारागार के बाहर तड़के से ही महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। हाथों में पूजा की थाली और रंग-बिरंगे धागे लिए पहुंचीं बहनों के दिलों में एक गहरी कसक थी कि काश उनका भाई आज आज़ाद हवाओं में उनके साथ होता। आंसुओं और मुस्कान के बीच जब बहनें जेल के भीतर पहुंचीं, तो सलाखों के पीछे भावुकता का सैलाब उमड़ पड़ा। सुरक्षा जांच के बाद बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। धूप और गर्मी से राहत देने के लिए परिसर में टेंट, छाया और शीतल जल की विशेष व्यवस्था की गई थी।
जेल प्रसासन का प्रबंध
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि लगभग 1500 बहनों के आगमन को देखते हुए सुबह 8:00 से शाम 5:00 बजे तक मुलाकात का समय तय किया गया है। परिसर के बाहर बजरंग दल के सौजन्य से जलपान का प्रबंध रहा, वहीं अंदर व बाहर हेल्प डेस्क तैनात की गई। यदि कोई बहन राखी या मिठाई नहीं ला सकी, तो उसे जेल प्रशासन की ओर से नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। उन्होंने आश्वस्त किया कि देर से पहुंचने वाली बहनों को भी बिना मुलाकात के निराश नहीं लौटने दिया जाएगा।
एटा जिला कारागार में मनाया गया रक्षाबंधन
बहनें आज सुबह से ही अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए जिला कारागार एटा के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़ी नजर आई। कुछ बहनों ने बताया कि हमारे भाई एक साल से बंद है किसी ने बताया तीन महीने से बंद है कुछ बहने बहुत मायूस दिखी इस रक्षाबंधन के त्योहार पर क्योंकि उनके भाई आज कारागार में निरुद्ध हैं। जेल प्रशासन ने कारागार में बहनों के लिए विशेष व्यवस्था की हैं। बहने अपने भाइयों के लिए राखी मिठाई लेकर पहुंची। इस दौरान कई भावुक कर देने वाले पल भी दिखाई दिए, जब बहन अपने भाई को राखी बांधते हुए भावुक हो गई।
मुरादाबाद जिला जेल
झाँसी जिला कारागार में रक्षाबंधन का पर्व भावुक माहौल के बीच मनाया गया। सुबह से ही बंद भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों की भीड़ जिला कारागार पहुंची और मुलाकात पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन लग गई। जेल प्रशासन की ओर से बहनों को रक्षा सूत्र और रोली-चंदन उपलब्ध कराया गया। वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अनूठी पहल की गई, जिसमें बंद भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार स्वरूप एक-एक पौधा दिया।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत बहनों की पूरी तलाशी के बाद उन्हें जेल परिसर में प्रवेश दिया गया। जेल में भाइयों की कलाई पर राखी बांधते समय कई बहनें भावुक नजर आईं। रक्षा सूत्र के इस पर्व ने जेल की चारदीवारी के भीतर भी भाई-बहन के प्रेम और रिश्ते की भावनाओं को जीवंत कर दिया।

