ग्रेटर नोएडा: ग्रेनो वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 में दुकान खरीदने के लिए रकम जमा करने के बाद न तो दुकान का कब्जा मिला और न ही रजिस्ट्री हो सकी। बुकिंग रद्द होने के बावजूद जमा की गई रकम वापस नहीं मिलने पर अब यह मामला अदालत पहुंच गया है। पीड़ित की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले में अब पीड़ित के बयान और साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, कृष्ण कुमार ने अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने नॉलेज पार्क-5 स्थित एक व्यावसायिक परियोजना में दुकान खरीदने के लिए आधार इन्फ्रा होल्डिंग लिमिटेड और उसके निदेशक के साथ 25 अप्रैल 2016 को समझौता किया था। करार के तहत ग्राउंड फ्लोर पर करीब 214 वर्गफुट क्षेत्रफल की दुकान 18 लाख रुपये में खरीदी जानी थी।
एडवांस के तौर पर दिए थे 9 लाख रुपये
पीड़ित के मुताबिक, दुकान की बुकिंग और बिक्री के करार के बाद उन्होंने कंपनी को एडवांस रकम के तौर पर 9 लाख रुपये चेक के माध्यम से जमा किए थे। उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी दुकान का कब्जा देगी और उसके नाम रजिस्ट्री की जाएगी। हालांकि, आरोप है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी कंपनी की ओर से न तो दुकान का कब्जा दिया गया और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे पीड़ित को अपनी जमा रकम को लेकर चिंता होने लगी। उन्होंने कंपनी से कई बार इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
बुकिंग रद्द करने का भेजा पत्र
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि करीब दो साल बाद कंपनी ने 11 अक्टूबर 2018 को बुकिंग निरस्त करने का पत्र भेज दिया। बुकिंग रद्द किए जाने के बाद पीड़ित को उम्मीद थी कि कंपनी उसकी ओर से जमा की गई 9 लाख रुपये की रकम वापस कर देगी। आरोप है कि बुकिंग निरस्त करने के बावजूद कंपनी ने जमा राशि वापस नहीं की। लंबे समय तक रकम वापस नहीं मिलने के बाद कृष्ण कुमार ने इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाया और संबंधित अधिकारियों व न्यायिक मंच के सामने अपनी शिकायत रखी।
रेरा में शिकायत के बाद सामने आई दूसरी जानकारी
मामले में पीड़ित की ओर से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) में भी शिकायत की गई। वहां शिकायत की सुनवाई के दौरान उन्हें कथित तौर पर पता चला कि जिस परियोजना में दुकान बुक कराई गई थी, वह रेरा में पंजीकृत नहीं थी। इसके बाद मामले को लेकर पीड़ित ने अदालत का रुख किया। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से तय शर्तों के मुताबिक रकम जमा की थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो संपत्ति मिली और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई।
अदालत ने पुलिस जांच की जरूरत नहीं मानी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल इस स्तर पर पुलिस से विवेचना कराने की आवश्यकता नहीं मानी। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को अपने साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने कृष्ण कुमार की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। अब इस मामले में शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे और उसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
18 सितंबर को होगी अगली कार्रवाई
अदालत ने मामले में बयान दर्ज करने के लिए 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। इस तारीख को शिकायतकर्ता की ओर से अपने पक्ष में साक्ष्य और बयान प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। करीब एक दशक पुराने इस विवाद में अब अदालत की प्रक्रिया के जरिए यह स्पष्ट होगा कि दुकान की बुकिंग, रकम जमा करने, बुकिंग निरस्त करने और धनराशि वापस न करने के आरोपों में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल अदालत ने शिकायत को परिवाद के रूप में स्वीकार करते हुए मामले को आगे बढ़ाने का रास्ता खोल दिया है।


