गोरखपुर में बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी एक परिवार के लिए काल बन गया। जलभराव वाली सड़क पर बिजली के पोल में करंट उतरने से कक्षा नौ में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र पुरुषोत्तम दुसाद की दर्दनाक मौत हो गई। छात्र घर से सामान लेने निकला था, लेकिन कुछ ही दूरी पर सड़क पर जमा पानी के बीच मौजूद बिजली के पोल की चपेट में आ गया। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, घटना ने नगर निगम और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर से सामान लेने निकला था छात्र, फिर नहीं लौटा
बताया जा रहा है कि पुरुषोत्तम दुसाद रोज की तरह अपने घर से सामान लेने के लिए निकला था। इलाके में बारिश के बाद सड़क पर काफी पानी जमा था। इसी दौरान सड़क किनारे लगे बिजली के पोल में करंट उतर गया। पानी में करंट फैलने की वजह से छात्र उसकी चपेट में आ गया। करंट लगते ही पुरुषोत्तम तड़पने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो अफरातफरी मच गई। लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी में करंट होने के कारण मदद करना भी बेहद जोखिम भरा था।
जब तक बिजली की आपूर्ति बंद कराई गई और उसे बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक परिवार के लिए जो दिन सामान्य तरीके से शुरू हुआ था, वह कुछ ही मिनटों में मातम में बदल गया। जिस बेटे को परिवार ने घर से बाहर भेजा था, वह वापस जिंदा नहीं लौट सका।
जलभराव ने बढ़ाया खतरा
बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आती रही है। सड़क पर जमा पानी केवल आवागमन में परेशानी नहीं पैदा करता, बल्कि अगर आसपास बिजली के खंभे, खुले तार या खराब विद्युत उपकरण मौजूद हों तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। पुरुषोत्तम की मौत ने इसी खतरे को उजागर कर दिया है।
सवाल यह है कि जलभराव वाले इलाके में बिजली के खंभों और विद्युत लाइनों की सुरक्षा की पहले से जांच क्यों नहीं की गई? अगर किसी पोल में करंट उतरने की स्थिति बनी थी तो समय रहते उसे चिन्हित कर बिजली आपूर्ति बंद क्यों नहीं की गई? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि हादसा होने से पहले विभागों को इस खतरे की जानकारी क्यों नहीं मिली।
नगर निगम और बिजली विभाग की भूमिका पर सवाल
घटना के बाद नगर निगम और बिजली विभाग दोनों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जलभराव की स्थिति में नगर निगम की जिम्मेदारी होती है कि पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और लोगों के लिए खतरे वाले स्थानों की पहचान की जाए। दूसरी ओर, बिजली विभाग के लिए यह जरूरी है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में विद्युत पोल, तार और अन्य उपकरण सुरक्षित स्थिति में हों।
ऐसे में यह हादसा केवल एक दुर्घटना मानकर आगे बढ़ जाना कई सवालों को अनदेखा करना होगा। अगर जलभराव और बिजली के पोल के बीच किसी तरह की तकनीकी समस्या थी, तो उसकी निगरानी और जांच पहले क्यों नहीं हुई, इसकी भी पड़ताल जरूरी है।
हादसे के बाद शुरू हुई जांच की प्रक्रिया
घटना के बाद संबंधित विभागों ने जांच की बात कही है। नगर निगम की ओर से जलभराव के कारणों की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। वहीं बिजली विभाग ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय से मामले की जांच कराने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित विभागों की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन परिवार और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि कार्रवाई की प्रक्रिया हादसे के बाद ही क्यों शुरू होती है। जिस खतरे को समय रहते पहचानकर दूर किया जा सकता था, उसकी जानकारी एक छात्र की जान जाने के बाद सामने आना व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पुरुषोत्तम की मौत से परिवार सदमे में है। परिवार ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि घर से कुछ सामान लेने निकला उनका 16 साल का बेटा इतनी भयावह घटना का शिकार हो जाएगा। किशोर की मौत ने परिवार से उसका भविष्य छीन लिया। वह अभी पढ़ाई कर रहा था और उसके सामने जिंदगी के कई सपने थे।
लेकिन एक लापरवाही ने उन सभी सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की नियमित जांच होनी चाहिए। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां बिजली के पोल सड़क या पानी के बीच स्थित हों, वहां सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
क्या हादसे से पहले टल सकती थी मौत?
इस घटना का सबसे अहम पहलू यही है कि क्या पुरुषोत्तम की मौत को रोका जा सकता था। अगर जलभराव की स्थिति की समय पर निगरानी होती, बिजली के पोल की जांच की जाती और खतरा मिलने पर तत्काल बिजली काट दी जाती, तो शायद एक परिवार को अपने बेटे को खोना नहीं पड़ता। जांच के बाद यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पोल में करंट कैसे उतरा, सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रही, जलभराव की स्थिति कितने समय से बनी हुई थी और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं।
अब जांच रिपोर्ट का इंतजार
प्रशासन और संबंधित विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच केवल कागजी प्रक्रिया बनकर न रह जाए। जरूरत इस बात की है कि हादसे की वास्तविक वजह सामने आए और जिम्मेदारी तय की जाए। पुरुषोत्तम की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह शहरों में जलभराव और बिजली सुरक्षा के बीच मौजूद गंभीर खतरे की याद दिलाती है। बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी और विद्युत व्यवस्था को लेकर यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।

