कासगंज: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में बाढ़ ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार जलभराव के चलते कई गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। हालात इतने खराब हैं कि कुछ गांवों में करीब 25 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है और ग्रामीणों को डर के साए में रात गुजारनी पड़ रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। पानी के साथ सांप और बिच्छू भी रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में किसी तरह हालात संभाल लेते हैं, लेकिन रात होते ही डर और बढ़ जाता है। अंधेरे में जहरीले जीवों के घर में घुसने का खतरा बना रहता है।
25 दिन से बिजली गुल, रात में बढ़ जाती है परेशानी
बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्रभावित है। ग्रामीणों के मुताबिक कई जगह करीब 25 दिन से बिजली नहीं आई है। लगातार अंधेरे के कारण लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। घरों के आसपास पानी भरा होने के चलते लोग रात में बाहर निकलने से भी बच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने से मच्छरों और जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। टॉर्च या मोबाइल की रोशनी के सहारे लोगों को घर के आसपास का हाल देखना पड़ रहा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार सबसे ज्यादा चिंतित हैं।
पानी के साथ घरों में पहुंच रहे सांप-बिच्छू
बाढ़ के पानी ने सिर्फ रास्तों और खेतों को ही नहीं डुबोया है, बल्कि लोगों के घरों तक भी पहुंच बना ली है। पानी में बहकर सांप, बिच्छू और दूसरे जहरीले जीव सूखे स्थान की तलाश में घरों की तरफ पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों के लिए यह स्थिति किसी डरावने सपने से कम नहीं है। कई परिवार रात में सोने से पहले बिस्तर और घर के कोनों को अच्छी तरह जांच रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर न जाने की हिदायत दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी और अंधेरे के बीच यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि खतरा कहां छिपा है।
अंधेरे में कट रही रातें, हर आहट पर चौंक रहे लोग
बाढ़ प्रभावित इलाकों में रात का समय सबसे ज्यादा मुश्किल भरा हो गया है। बिजली नहीं होने और चारों तरफ पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को हर छोटी आहट पर डर लगने लगा है। घर के बाहर पानी में हलचल दिखाई देने पर लोग आशंकित हो जाते हैं कि कहीं कोई सांप या दूसरा जहरीला जीव तो नहीं आ गया। कई परिवारों ने रात में घर के दरवाजे बंद रखना शुरू कर दिया है। वहीं, जिन घरों में पानी या सीलन ज्यादा है, वहां सामान और जरूरी चीजों को ऊंचे स्थान पर रखा जा रहा है।
खेत और रास्ते भी पानी में डूबे
बाढ़ के कारण गांवों के आसपास के खेत और संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। पानी भरने से लोगों का सामान्य आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। किसानों के लिए भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। खेतों में पानी भरा होने से फसलों को नुकसान की आशंका है। लंबे समय तक जलभराव रहने पर फसलें खराब होने का खतरा और बढ़ सकता है।
ग्रामीणों की मांग- जल्द बहाल हो बिजली और मिले राहत
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के बीच सबसे पहले बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अंधेरे में जहरीले जीवों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से निगरानी, दवा का छिड़काव और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग भी उठ रही है।
फिलहाल बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की जिंदगी सामान्य नहीं हो पाई है। दिनभर पानी और समस्याओं से जूझने के बाद जब रात होती है तो अंधेरा और जहरीले जीवों का डर ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा देता है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द बिजली व्यवस्था बहाल कराने और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।

