लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चार पन्नों का नया शपथपत्र दाखिल करते हुए भर्ती विवाद के समाधान के लिए अपना पक्ष रखा। सरकार ने अदालत से कहा है कि संशोधित मेरिट सूची में स्थान पाने वाले पात्र अभ्यर्थियों को पहले से नियुक्त शिक्षकों को हटाए बिना समायोजित करने की व्यवस्था की जा सकती है। सरकार के इस हलफनामे के बाद अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इस मामले का असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार ने अपने नए शपथपत्र में 20 जुलाई को दाखिल किए गए हलफनामे का भी उल्लेख किया है। सरकार का कहना है कि यदि संशोधित मेरिट सूची के आधार पर कुछ नए अभ्यर्थी चयनित होते हैं, तो उन्हें पहले से कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति प्रभावित किए बिना समायोजित किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह समायोजन प्रदेश में उपलब्ध रिक्त पदों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। शिक्षक

साथ ही केवल वही अभ्यर्थी इस लाभ के पात्र होंगे जो भर्ती की सभी न्यूनतम निर्धारित योग्यताओं को पूरा करते हों। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इस व्यवस्था को भविष्य में किसी अन्य भर्ती के लिए उदाहरण (नजीर) नहीं माना जाए। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी अंतिम निर्देश देगा, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा। शिक्षक

आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने जताया विरोध
दूसरी ओर, आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी सरकार के इस रुख से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार का प्रस्ताव केवल समायोजन तक सीमित है, जबकि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं का समाधान नहीं करता। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट की एकल पीठ से लेकर खंडपीठ तक जिन याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में लड़ाई लड़ी है, उन्हें उनके अधिकार के अनुसार लाभ दिया जाना चाहिए। साथ ही भर्ती की मूल चयन सूची भी सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। शिक्षक

19 हजार सीटों पर आरक्षण घोटाले का आरोप
पिछड़ा-दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप और प्रदेश प्रवक्ता शिव शंकर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि 69000 शिक्षक भर्ती में लगभग 19 हजार सीटों पर आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। उन्होंने मांग की है कि सरकार केवल समायोजन की बात न करे, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिलाए। शिक्षक

आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई को इस लंबे समय से चल रहे विवाद के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अदालत सरकार के प्रस्ताव पर सहमति जताती है तो संशोधित मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों के लिए राहत का रास्ता खुल सकता है। वहीं, यदि कोर्ट आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अलग निर्देश देता है तो भर्ती प्रक्रिया में और बड़े बदलाव संभव हैं। करीब छह वर्षों से विवादों में घिरी 69000 शिक्षक भर्ती अब अंतिम कानूनी चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में हजारों अभ्यर्थी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके भविष्य की अनिश्चितता को समाप्त करेगा। शिक्षक

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