लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत को लेकर बड़ा बयान दिया है। लखनऊ में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने साफ किया कि उनकी पार्टी का जिस दल के साथ गठबंधन है, वह जारी रहेगा। उनके इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठजोड़ को लेकर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर किसी तरह की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी अपने मौजूदा गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी। उनके बयान से यह संदेश गया है कि पार्टी चुनावी तैयारियों में गठबंधन के साथियों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर कायम है।
गठबंधन की राजनीति सपा के लिए नई नहीं
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी का गठबंधन का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। उस चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा, हालांकि गठबंधन सत्ता में वापसी नहीं कर सका और भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत के साथ सरकार बनाई। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी के साथ हाथ मिलाया। सपा-बसपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ मजबूत सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश की। चुनाव परिणामों में बसपा को 10 और समाजवादी पार्टी को 5 लोकसभा सीटें मिलीं। हालांकि अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद दोनों दलों का गठबंधन आगे जारी नहीं रह सका।
2022 में बदल चुका है गठबंधन का समीकरण
2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की रणनीति अपनाई। समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल समेत कई सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा को चुनौती दी। सपा गठबंधन सत्ता परिवर्तन तो नहीं कर सका, लेकिन समाजवादी पार्टी की विधानसभा सीटों और वोट प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 111 विधानसभा सीटें जीतीं और मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी। वहीं आरएलडी ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। गठबंधन की राजनीति ने खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा-आरएलडी के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
2024 में ‘इंडिया’ गठबंधन से मिली बड़ी कामयाबी
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा। इस चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश में 37 लोकसभा सीटें जीतकर अपने इतिहास का सबसे मजबूत लोकसभा प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने भी प्रदेश में 6 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 33 सीटों पर रोकने में सपा-कांग्रेस गठबंधन की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया कि गठबंधन के साथ सामाजिक समीकरण और सीटों के तालमेल का चुनावी असर पड़ सकता है।
2027 के लिए अखिलेश का संदेश साफ
अब अखिलेश यादव का यह कहना कि जिस पार्टी के साथ गठबंधन है, वह जारी रहेगा, 2027 की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन सपा ने गठबंधन की राजनीति को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अखिलेश यादव के सामने चुनौती सिर्फ सहयोगी दलों को साथ बनाए रखने की नहीं, बल्कि सीटों के बंटवारे और सामाजिक समीकरण को भी संतुलित रखने की होगी। 2017 से 2024 तक सपा के गठबंधन प्रयोगों का अनुभव बताता है कि हर चुनाव में सहयोगियों और सीटों का गणित बदलता रहा है।
ऐसे में लखनऊ की प्रेस कान्फ्रेंस से अखिलेश यादव का संदेश फिलहाल यही है कि समाजवादी पार्टी अपने मौजूदा गठबंधन को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2027 के चुनावी मैदान में यह गठबंधन किस स्वरूप में सामने आता है और सीटों के बंटवारे का फार्मूला क्या रहता है।
रिपोर्ट- फ़रमान अब्बास मन्जुल (लखनऊ)


